
मेरठ हीरा टाइम्स ब्यूरो। नई सीमाओं की खोज विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 10 फरवरी 2025 को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के अटल सभागार में शुरू हुई। यह कार्यक्रम सीसीएसयू, मेरठ के जूलॉजी विभाग द्वारा भारतीय क्रोनोबायोलॉजी सोसायटी (आईएनएससी) के सहयोग से संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। संगोष्ठी में प्रख्यात विद्वान, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और छात्र कार्यात्मक जीव विज्ञान में उभरते रुझानों और नवाचारों का पता लगाने के लिए एक साथ आए। कुलपति और संगोष्ठी की मुख्य संरक्षक प्रो. संगीता शुक्ला के मार्गदर्शन और प्रयासों के तहत, उद्घाटन सत्र की शुरुआत प्रतिष्ठित संरक्षकों की उपस्थिति में हुईरू सीसीएसयू, मेरठ के प्रो वाइस चांसलर प्रो. मृदुल कुमार गुप्ता, मैसूर विश्वविद्यालय से प्रो. मेवा सिंह और प्दैब् के अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार। उन्होंने क्रोनोबायोलॉजी, फिजियोलॉजी और पर्यावरण विज्ञान जैसे विविध क्षेत्रों में कार्यात्मक जीव विज्ञान की प्रगति और अनुप्रयोगों पर व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान किए।
सीसीएसयू के जूलॉजी विभाग की अध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. बिंदु शर्मा ने परिचयात्मक भाषण देते हुए स्वास्थ्य, पर्यावरण और जैव प्रौद्योगिकी में वैश्विक चुनौतियों से निपटने में कार्यात्मक जीव विज्ञान की भूमिका पर जोर दिया। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. संजय कुमार भारद्वाज ने संगोष्ठी के उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों पर प्रकाश डालते हुए गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजन समिति के अन्य सदस्य एमेरिटस प्रो. एसएस लाल, एमेरिटस प्रो. ए.के. चौबे, प्रो. नीलू जैन गुप्ता, डॉ. डी.के. चौहान और डॉ. अंशु चौधरी भी मौजूद थे। संगोष्ठी में कार्यात्मक जीव विज्ञान के विभिन्न उपक्षेत्रों को कवर करते हुए मुख्य व्याख्यान और पोस्टर प्रदर्शन सहित कई सत्र शामिल थे। प्रख्यात वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने अपने नवीनतम निष्कर्षों को साझा किया। बैंगलोर के के.एन. गणेशैया, जिन्होंने चींटी समाज जटिल आवासों में कैसे भोजन की तलाश करते हैं? भर्ती, संचार और भोजन की कटाई में अनुकूली रणनीतियाँश् पर व्याख्यान दिया और मैसूर विश्वविद्यालय के प्रो. मेवा सिंह, जिन्होंने चर्चा की कि वैज्ञानिक इनपुट और स्थानीय पहल नीति को प्रभावित करती है, वन्यजीव संरक्षण की कुंजी है। दूसरे सत्र के वक्ताओं में शामिल थेरू एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा के प्रो. बीरेन एन. मलिक, जिन्होंने श्रैपिड आई मूवमेंट स्लीप का विकासवादी महत्वश् पर व्याख्यान दियाय आईआईटी हैदराबाद के प्रो. संदीपन रे, जिन्होंने श्सर्कैडियन सिस्टम और सर्कैडियन लय के औषधीय मॉड्यूलेटर को समझने के लिए मास स्पेक्ट्रोमेट्री आधारित मात्रात्मक प्रोटिओमिक्स और मेटाबोलोमिक्सश् पर बात की। अंतिम सत्र में प्रख्यात वक्ता दिनेश शर्मा शामिल थे, जिन्होंने ष्जीव विज्ञान में अनुसंधान के उभरते क्षेत्रों के रूप में जैव-संगीत विज्ञान और संगीत चिकित्सा की जांचष् पर व्याख्यान दिया। और आकांक्षा शर्मा ने ष्प्रवासी रेडहेडेड बंटिंग्स के मौसमी मांसपेशी शरीर विज्ञानष् पर व्याख्यान दिया। इस सेमिनार ने शोधकर्ताओं और छात्रों को ज्ञान का आदान-प्रदान करने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान हुई चर्चाओं और प्रस्तुतियों ने जैविक कार्यों के जटिल तंत्र को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी प्रतिभागियों, प्रायोजकों और सहयोगियों की हार्दिक सराहना की।
सेमिनार 11 फरवरी 2025 को जारी रहेगा।