मेरठ। उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण और बिजली दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी के विरोध में किसानों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि सरकार 30 प्रतिशत बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव ला रही है। किसान नेताओं ने बताया कि बिजली विभाग का 19,600 करोड़ रुपये का घाटा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है। स रकारी विभागों और बड़े उपभोक्ताओं पर 72,000 करोड़ रुपये से अधिक के बिजली बिल बकाया हैं। किसानों ने मांग की है कि दक्षिणांचल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण रोका जाए। प्रदर्शनकारियों ने स्मार्ट मीटर, पीक आवर्स में अलग-अलग दरें और बिजली दरों में 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी का विरोध किया। उन्होंने किसानों के लिए नलकूपों पर 18 घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों में 20 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति की मांग की। किसानों ने सरकार से 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली और नलकूपों के बिल माफी की मांग की। उन्होंने उपभोक्ताओं से वसूले गए 31,725 करोड़ रुपये के अवैध टैक्स को बिलों में समायोजित करने की मांग की। साथ ही, बिजली विभाग में रिक्त पदों को भरने और संविदा कर्मियों को नियमित करने की मांग भी रखी। प्रदर्शनकारियों ने जर्जर तारों, खंभों और ट्रांसफॉर्मर को बदलने की मांग की। गन्ने का एमएसपी 500 रुपये प्रति कुंतल करने, किसानों के बकाया भुगतान और बंद चीनी मिलों को चालू करने की मांग भी की गई। साथ ही सहकारिता विभाग में किसानों के कर्ज पर बढ़ाए गए ब्याज को वापस लेने की मांग की गई।
