
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों, खासकर दिल्ली और उत्तर भारत में घने कोहरे के कारण हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कम दृश्यता की वजह से अनेक उड़ानें देरी से संचालित हो रही हैं, जबकि कई को रद्द भी करना पड़ रहा है। ऐसे में यात्रियों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि फ्लाइट लेट या कैंसिल होने की स्थिति में उनके क्या अधिकार हैं और रिफंड या मुआवजा कैसे मिलेगा।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट नियम तय किए हैं। इन दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि यात्री समय पर चेक-इन कर चुके हैं और उड़ान में देरी या रद्द होने की स्थिति बनती है, तो एयरलाइंस को यात्रियों को आवश्यक सुविधाएं, रिफंड और मुआवजा प्रदान करना अनिवार्य है।
DGCA के नियमों के तहत, यदि उड़ान दो से चार घंटे की देरी से रवाना होती है, तो प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों को निःशुल्क भोजन और पेय उपलब्ध कराना एयरलाइन की जिम्मेदारी होती है। यदि देरी छह घंटे से अधिक हो जाती है, तो यात्रियों को वैकल्पिक उड़ान या पूर्ण धनवापसी का विकल्प दिया जाता है। लंबी देरी की स्थिति में होटल में ठहरने और आने-जाने की व्यवस्था भी की जाती है।
उड़ान रद्द होने की स्थिति में यात्रियों को पूरा रिफंड दिया जाना अनिवार्य है। यदि समय रहते उड़ान रद्द होने की सूचना नहीं दी जाती या यात्री कनेक्टिंग फ्लाइट मिस कर देते हैं, तो 5,000 से 10,000 रुपये तक के मुआवजे का प्रावधान है। हालांकि, यदि देरी या रद्दीकरण मौसम, प्राकृतिक आपदा या राजनीतिक अशांति जैसे एयरलाइन के नियंत्रण से बाहर कारणों से होता है, तो होटल या अन्य अतिरिक्त सुविधाएं देना अनिवार्य नहीं होता।
मुआवजे के नियमों के अनुसार, उड़ान एक घंटे की देरी से रद्द होने पर 5,000 रुपये और दो घंटे की देरी पर 10,000 रुपये तक का मुआवजा दिया जा सकता है। इसके अलावा, यदि 24 घंटे बाद फिर से बुकिंग करनी पड़ती है, तो यात्रियों को 20,000 रुपये तक का मुआवजा मिलने का प्रावधान है।
इसके साथ ही, यदि हवाई यात्रा के दौरान यात्रियों का सामान खो जाता है या क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो उसके लिए भी मुआवजा दिया जाता है। यात्रियों को टिकट रद्द करने की सुविधा भी उपलब्ध है। उड़ान से सात दिन पहले तक टिकट रद्द करने पर सभी करों और शुल्कों सहित पूरा रिफंड देने का नियम लागू है।
