
हापुड संवाददाता। दुनिया भर के सैंतीस देशों में चलने वाली साहित्यक संस्था हिंदी साहित्य भारती का वार्षिक उत्सव पिलखुवा में मनाया गया जिसमें बेखौफ शायर से प्रसिद्ध डा.नरेश कुमार सागर को सम्मानित किया गया। जनकवि बेखघैफ शायर ने पढ़ा कि….नफरत लेकर चल रहे, मीठी करते बात। दो चेहरों के लोग ये, करें घात पै घात। तो वहीं डा.जितेंद्र कुमार जीत ने पढ़ा कि….जब ये जिंदगी शुरू होती है, खुशी से गम से रूबरू होती है।। डा.सुनील सरकार ने कुछ यूं पढ़ा कि…..उसे भुलाकर भी कुछ ना मिला प्यार में। आज भी जिंदगी गुजर रही है सिर्फ उसके इंतजार में। युवा कवि अंकित इंकलाब ने पढ़ा…सुनोगे किस्से मेरे तो रोने लगोगे तुम मेरा त्याग देखकर खुद को खोने लगोगे तुम । तो वहीं सचिन सागर ने भी कुछ इस अंदाज में पढ़ा कि…. दर्द की अब दवा कीजिए। मेरे हक में दुआ कीजिए।। कार्यक्रम में संस्था के अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.रविंद्र शुक्ल ने सभी का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वागीश दिनकर मुख्य अतिथि ने की । प्रसिद्ध गीतकार मनोज कुमार मनोज व कवियत्री प्रतिभा त्रिपाठी संस्था की वार्षिकी काव्य संकलन का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर विजय वत्स, राजकुमार हिंदुस्तानी, अशोक गोयल, मनीषा मनु आदि की उपस्थिति रही मंच संचालन डा.सतीश वर्धन व दिनेश त्यागी उपस्थित रहे।