
मेरठ संवाद सूत्र। मेरठ के डीआईजी कलानिधि नैथानी ने रेंज के जिलों में ऑपरेशन कनविक्शन के तहत अपराधियों को सजा दिलाने के मामलों की समीक्षा की। इस समीक्षा में रेंज में बुलंदशहर जिले की पुलिस ने इस साल में सबसे ज्यादा अपराधियों को सजा दिलाई है। दूसरे नंबर पर मेरठ पुलिस ने अपराधियों को सजा दिलाई। डीआईजी कलानिधि नैथानी ने बताया कि मेरठ में 38 मुकदमों में आजीवन कारावास की सजा कराई गई। 18 में 14 से 20 वर्ष तक का कारावास, 32 में 14 वर्ष से कम का कारावास कराया गया। बुलंदशहर में 102 मुकदमों में आजीवन कारावास, 63 में 14-20 वर्ष का कारावास, 262 में 14 वर्ष से कम का कारावास कराया गया। बागपत में 23 मुकदमों में आजीवन कारावास, 19 में 14-20 वर्ष तक का कारावास, 206 में 14 वर्ष से कम का कारावास कराया गया। हापुड़ में 30 मुकदमों में आजीवन कारावास, 12 में 14-20 वर्ष तक का कारावास तथा 56 में 14 वर्ष से कम का कारावास कराया गया। वहीं, पिछले 6 महीने में मेरठ परिक्षेत्र के अंतर्गत चारों जनपदों में पॉक्सो एवं बलात्कार के मुकदमों में 191, आपराधिक मामले (हत्या/लूट/डकैती/अपहरण आदि) के मुकदमों में 676 और अन्य सनसनीखेज मामलों के मुकदमों में 2606 अपराधों में न्यायालय द्वारा अपराधियों को सजा दी गयी। बागपत में पॉक्सो एवं बलात्कार के अभियोग में 35 अपराधों में, आपराधिक मामले के अभियोगों में 213 में और अन्य सनसनीखेज मामलों के अभियोग में 278 अपराधों में न्यायालय द्वारा अपराधियों को सजा दी गयी। जनपद हापुड़ में पॉक्सो एवं बलात्कार के अभियोग में 36 अपराधों में, आपराधिक मामले के अभियोगों में 68 में और अन्य सनसनीखेज मामलों के अभियोग में 658 अपराधों में न्यायालय द्वारा अपराधियों को सजा दी गयी। डीआईजी कलानिधि नैथानी ने बताया कि जिन जनपदों के पैरोकारों द्वारा प्रभावी पैरवी कराते हुए कम समय में अपराधियों को सजा दिलवाने में अपना अहम योगदान दिया है, उन्हें परिक्षेत्र स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।