
नई दिल्ली एजेंसी। बिम्सटेक की बैठक में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थाइलैंड पहुंचे तो यहां इन्होंने थाईलैंड की प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। बैठक के बाद दोनों ही नेताओं की तरफ से साझा बयान भी सामने आ गया। इसी बयान देने के क्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने चीन का बिना नाम लिए हुए थाइलैंड की धरती से चीन पर निशाना साधा।
उन्होंने चीन के विस्तारवाद की नीति को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा है कि भारत विकासवाद पर यकीन करता है, न कि विस्तारवाद पर। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत ‘विस्तारवाद’ के बजाय ‘विकासवाद’ की नीति में विश्वास रखता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और थाईलैंड के बीच पर्यटन, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यकीनन पीएम मोदी का ये बयान चीन को परेशान करेगा क्योंकि पीएम मोदी ने ये बयान अपने देश में न देकर बिम्सटेक की बैठक से ठीक पहले थाइलैंड की जमीन पर दिया है। थाइलैंड और चीन के रिश्ते सांस्कृतिक या फिर ट्रेड के स्तर पर बेहद ही अच्छे माने जाते हैं। ऐसे में भारत का एकतरफ चीन के विस्तारवाद पर निशाना और दूसरी तरफ थाइलैंड के साथ रक्षा-सुरक्षा व्यापार को बढ़ाना और सहयोग को और मजबूत करने का फैसला चीन को और परेशान करेगा। पीएम मोदी ने शिनावात्रा के साथ हुई बातचीत के बारे में कहा, हमने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और थाईलैंड के बीच पर्यटन, संस्कृति एवं शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग पर जोर दिया है। हमने आपसी व्यापार, निवेश और व्यवसायों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्य उद्योग (एमएसएमई), हथकरघा और हस्तशिल्प में सहयोग के लिए भी समझौते किए गए हैं। भारत और थाईलैंड ने रणनीतिक साझेदारी की स्थापना को लेकर एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए और डिजिटल प्रौद्योगिकियों से लेकर संस्कृति तक के क्षेत्रों में पांच सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए। अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने के बाद चीन के तेवर वैसे ही इन दिनों ढीले पड़े हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि ये चीन और भारत दोनों के साझेदार बनने का सही समय है। शी जिनपिंग ने कहा है कि दोनों देशों को अपनी दोस्ती को औ मजबूत करना चाहिए। चीन के राष्ट्रपति ने कहा है कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच सहयोग की बहुत बड़ी क्षमता है। सवाल ये है कि चीन का इरादा क्या है और इस बाबत भारत को क्या रुख अपनाना चाहिए? चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत को पत्र लिखा है। चीन की तरफ से भारत को कूटनीतिक संबंध के 75 वर्ष होने पर पत्र लिखा गया है। कई बार ये कहा जाता है कि चीन की कथनी और करनी में अंतर होता है। चीन की बातें मत सुनो चीन जमीन पर क्या कर रहा है, उस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। दरअसल, भारत डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से निपटने के लिए एक के बाद एक कई कूटनीतिक कदम उठा रहा है।