
मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर बुधवार को बंद का व्यापक असर देखने को मिला। केंद्रीय संघर्ष समिति के आह्वान पर हुए इस बंद में मेरठ के लगभग 1200 संगठनों ने समर्थन दिया, जिसके चलते सुबह से ही अधिकांश बाजार स्वतः बंद रहे। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहे।

मेरठ में अधिवक्ताओं की आठ टीमें सुबह से शहर में निकलीं। जिला बार अध्यक्ष के नेतृत्व में कचहरी गेट पर धरना जारी रहा। बेगम पुल पर अधिवक्ताओं और व्यापारियों ने मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन किया, जहां कुछ देर के लिए यातायात भी बाधित हुआ। संयुक्त व्यापार संघ, निजी स्कूल, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन और पेट्रोल पंप यूनियन ने भी बंद का समर्थन किया, जिससे शहर की गतिविधियां काफी हद तक ठप रहीं। अधिवक्ताओं ने दावा किया कि शहर में बंद लगभग पूरी तरह सफल रहा और जहां कहीं दुकानें खुलीं, उन्हें भी व्यापारियों ने स्वेच्छा से बंद कर दिया।

सहारनपुर में अधिवक्ता एसोसिएशन के वकीलों ने अपने चेंबर बंद कर कचहरी के मुख्य द्वार पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यहां व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर बंद का असर आंशिक रहा। मुजफ्फरनगर में अधिवक्ताओं और व्यापारियों ने बाजार बंद रखे और शहर के छह प्रमुख चौराहों पर निगरानी प्वाइंट बनाए गए। इस बीच कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पश्चिमी यूपी के किसी एक मंडल में हाई कोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग की और इसे 22 जिलों के वादकारियों के लिए जरूरी बताया।

बुलंदशहर में जिला बार एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदर्शन हुआ। यहां बड़े शोरूम और दुकानें बंद रहीं, जबकि कुछ छोटे व्यापारियों ने दुकानें खोलनी शुरू कर दीं। बिजनौर में बंद का खास असर नहीं दिखा, हालांकि अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री कार्यालय में तालाबंदी कर धरना दिया और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

बागपत में बंद का मिला-जुला असर रहा। अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर और दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। ज्ञापन लेने में देरी को लेकर डीएम के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। शामली में अधिवक्ता कलक्ट्रेट में एकत्र हुए और पदयात्रा कर शिव चौक तक जाने का कार्यक्रम तय किया गया, जबकि कैराना में भी प्रदर्शन की तैयारी रही। हालांकि जिले में बंद का असर सीमित ही नजर आया।

कुल मिलाकर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर आंदोलन का प्रभाव अलग-अलग स्तर पर दिखाई दिया, वहीं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा।
