मेरठ हीरा टाइम्स ब्यूरो। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में शुक्रवार प्रातः 7ः30 बजे मेरठ की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर श्री औघड़नाथ मंदिर परिसर में सामूहिक योगाभ्यास शिविर का आयोजन किया गया। योग विज्ञान विभाग एवं साहित्यिक-सांस्कृतिक परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम को प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर की। इस पवित्र क्रिया के पश्चात उन्होंने शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं के साथ योग अभ्यास कर जनमानस को एक सशक्त संदेश दिया कि योग न केवल शरीर का बल्कि आत्मा और मन का भी उत्थान करता है।
सभी उपस्थित प्रतिभागियों ने ताड़ासन, वज्रासन, भुजंगासन, अनुलोम-विलोम और विशेष रूप से सूर्य नमस्कार का अभ्यास किया, जो तन और मन को संतुलित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योग विधि है। श्रद्धालुओं, बच्चों ने भी इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह आयोजन केवल एक योगाभ्यास नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, चेतना और आत्मबोध का जीवंत उदाहरण बन गया। कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने इस अवसर पर कहा कि “ऐसे पवित्र और ऐतिहासिक स्थल पर योग करना न केवल हमारे शरीर को स्वस्थ करता है, बल्कि यह हमें हमारी संस्कृति, आत्मा और देशभक्ति से जोड़ता है। सूर्य नमस्कार जैसे अभ्यास हमें हमारी जड़ों से जोड़ते हैं और भविष्य की पीढ़ियों को शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाते हैं। यह आयोजन कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के उस दूरदर्शी दृष्टिकोण का प्रतीक है, जिसमें विश्वविद्यालय केवल शिक्षा केंद्र नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले नैतिक संस्थान बनने चाहिए।”इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कृष्णकांत शर्मा ने बताया कि श्री औघड़नाथ मंदिर, जिसे काली पलटन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, 1857 की क्रांति की भूमि है और ऐसे ऐतिहासिक स्थल पर योग करना हर प्रतिभागी के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव बन गया।
इस अवसर पर शोध निदेशक प्रो. बीरपाल सिंह, प्रोफेसर नीलू जैन गुप्ता, प्रोफेसर कृष्णकांत शर्मा, प्रोफेसर राकेश कुमार शर्मा,राष्ट्रीय सेवा योजना के विश्वविद्यालय समन्वयक डॉ. दुष्यंत चौहान, एनसीसी अधिकारी डॉ. अनिल कुमार यादव, विश्वविद्यालय अभियंता मनीष मिश्रा, डॉ. धर्मेंद्र कुमार, योगाचार्य अमरपाल, सत्यम सिंह, ईशा पटेल, नवज्योति और इंजीनियर प्रवीण पवार डॉ कमल शर्मा आदि मौजूद रहे। पूरे आयोजन में वातावरण पूरी तरह सात्विक, प्रेरणादायी और ऊर्जा से भरा हुआ रहा। मंदिर की पवित्रता और योग की अनुभूति ने जब एकाकार रूप लिया, तो वह क्षण हर किसी के लिए स्मरणीय बन गया। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा किया गया यह प्रयास न केवल शिक्षण संस्थानों के लिए एक उदाहरण है, बल्कि समाज को अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ स्वास्थ्य की ओर लौटने का भी संदेश देता है। इस कार्यक्रम से प्रेरित होकर मंदिर में आए श्रद्धालुगण एवं नन्हे बच्चों ने भी योग अभ्यास में हिस्सा लिया।
