मेरठ से प्रयागराज तक बन रहा 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे लगभग 95 प्रतिशत तैयार हो चुका है और जल्द इसे जनता को समर्पित किया जा सकता है। इस बीच उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने औद्योगिक विकास को गति देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। प्राधिकरण ने प्रदेश के 14 जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर औद्योगिक गलियारों के लिए 200 से 300 बीघा अतिरिक्त भूमि खरीदने के निर्देश दिए हैं। इस कदम का उद्देश्य एक्सप्रेसवे के साथ-साथ आसपास के जिलों में भी औद्योगिक निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
HIGHLIGHTS
- मेरठ–प्रयागराज गंगा एक्सप्रेसवे का 95 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा
- एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारों का दायरा बढ़ाने की तैयारी
- UPEIDA ने 14 जिलों के DM को 200–300 बीघा अतिरिक्त भूमि खरीदने के निर्देश दिए
- कुछ ऐसे जिलों में भी औद्योगिक गलियारे प्रस्तावित, जहां से एक्सप्रेसवे नहीं गुजरता
- औद्योगिक विस्तार से रोजगार और निवेश बढ़ने की उम्मीद
मेरठ–प्रयागराज गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। करीब 95 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है और अधिकांश जिलों में ट्रायल रन भी सफलतापूर्वक किया जा चुका है। सरकार जल्द ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आम जनता को समर्पित करने की तैयारी में है। इसी बीच राज्य सरकार ने एक्सप्रेसवे से जुड़े औद्योगिक विकास को और गति देने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने प्रदेश के 14 जिलों के जिलाधिकारियों को विशेष पत्र भेजकर औद्योगिक गलियारों के लिए अतिरिक्त भूमि खरीदने के निर्देश दिए हैं। पत्र में प्रत्येक जिले में पहले से प्रस्तावित भूमि के अलावा न्यूनतम 200 और अधिकतम 300 बीघा जमीन क्रय करने को कहा गया है। यह कदम मेरठ से प्रयागराज तक औद्योगिक निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण दिसंबर 2021 में शुरू हुआ था। यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 जिलों से होकर गुजरता है और इसके चालू होने से मेरठ से प्रयागराज की यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे के दोनों ओर औद्योगिक गलियारे विकसित किए जा रहे हैं, जहां उद्योग, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
वर्तमान में अमरोहा के हसनपुर क्षेत्र में 135 हेक्टेयर, संभल में 142 हेक्टेयर, बदायूं में 132 हेक्टेयर और हापुड़ जिले में 240 हेक्टेयर भूमि पर औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना है। इन क्षेत्रों में भूमि खरीद की प्रक्रिया पहले से चल रही है। अब नए निर्देशों के तहत इन परियोजनाओं के दायरे को और बढ़ाया जाएगा।
गौर करने वाली बात यह है कि चित्रकूट, औरैया और हमीरपुर जैसे कुछ जिले ऐसे भी हैं, जहां से गंगा एक्सप्रेसवे नहीं गुजरता, फिर भी वहां औद्योगिक गलियारे विकसित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा और एक्सप्रेसवे से जुड़े व्यापक आर्थिक लाभ आसपास के जिलों तक पहुंचेंगे।
इस संबंध में अमरोहा की जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने बताया कि जिले में औद्योगिक गलियारे के लिए निर्धारित भूमि पहले ही चिह्नित की जा चुकी है और अधिग्रहण की कार्रवाई जारी है। अतिरिक्त भूमि को लेकर फिलहाल कोई नया पत्र प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन पत्र मिलने पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि गंगा एक्सप्रेसवे को केवल एक परिवहन परियोजना तक सीमित न रखकर इसे प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास का मजबूत आधार बनाया जा रहा है।
