
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है, जिसमें विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. संगीता शुक्ला के नाम और फोटो का दुरुपयोग कर व्हाट्सएप के जरिए रुपये मांगने की कोशिश की गई। ठगों ने कुलपति का फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. विकास शर्मा से संपर्क किया, हालांकि उनकी सतर्कता और सूझबूझ के चलते ठगी का प्रयास असफल हो गया।
प्रोफेसर डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि सुबह करीब 11:17 बजे उनके मोबाइल फोन पर एक व्हाट्सएप संदेश प्राप्त हुआ। जिस मोबाइल नंबर से यह संदेश आया था, उस पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. संगीता शुक्ला की प्रोफाइल फोटो लगी हुई थी, जिससे पहली नजर में ऐसा प्रतीत हो रहा था कि संदेश स्वयं कुलपति की ओर से भेजा गया है। शुरुआती बातचीत सामान्य औपचारिकता के साथ की गई और उनसे यह भी पूछा गया कि वह उस समय क्या कर रहे हैं।
कुछ ही देर बाद बातचीत का रुख बदल गया और प्रोफेसर डॉ. विकास शर्मा से किसी खाते में तत्काल कुछ राशि जमा करने का अनुरोध किया गया। इस संदेश ने उन्हें सतर्क कर दिया। उन्हें यह समझने में देर नहीं लगी कि कुलपति के नाम पर कोई साइबर ठग उन्हें धोखा देने की कोशिश कर रहा है। संदेह पक्का होने पर उन्होंने बिना घबराए ठगों को जवाब दिया।
डॉ. शर्मा ने व्हाट्सएप पर स्पष्ट शब्दों में लिखा कि उनकी कुलपति इतनी गरीब नहीं हैं कि इस तरह किसी से व्यक्तिगत तौर पर रुपये मांगें। यह जवाब मिलते ही सामने वाले नंबर से संदेश भेजने का सिलसिला तुरंत बंद हो गया और इसके बाद कोई और संपर्क नहीं किया गया।
डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि इस पूरी घटना के बाद उन्होंने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. संगीता शुक्ला सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी साइबर ठगी से समय रहते बचाव किया जा सके।
इस घटना के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों के बीच सतर्कता बढ़ गई है। साइबर ठग लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम व फोटो का इस्तेमाल कर भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान नंबर से रुपये मांगने वाले संदेशों को गंभीरता से परखना चाहिए और बिना पुष्टि के किसी भी प्रकार का लेन-देन नहीं करना चाहिए।
