
Yogi Adityanath, chief minister of Uttar Pradesh, speaks during a news conference in Lucknow, India, on Friday, March 19, 2021. The ruling Bharatiya Janata Party faces a slew of provincial elections this year and next, including in key Uttar Pradesh state, which sends the largest number of lawmakers to the parliament. Photographer: T. Narayan/Bloomberg via Getty Images
लखनऊ एजेंसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को हाल ही में संपन्न महाकुंभ 2025 पर राज्य विधानसभा को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में कुंभ मेले के दौरान अपराध या छेड़छाड़ की कोई घटना नहीं हुई। योगी ने कहा कि महाकुंभ के 45 दिनों में देश-दुनिया से 66 करोड़ से ज्यादा लोग मेले में आए। महाकुंभ में आने वाले 66 करोड़ लोगों में से आधी महिला तीर्थयात्री रही होंगी, लेकिन उत्पीड़न, लूट, अपहरण या हत्या की एक भी घटना नहीं हुई।
योगी ने दावा किया कि अपेक्षित संख्या से अधिक लोग महाकुंभ में आए और जो लोग आए और पवित्र स्नान किया, वे अभिभूत महसूस कर रहे थे। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी की प्रयागराज महाकुंभ की सराहना की गई है। सपा पर वार करते हुए उन्होंने कहा कि महाकुंभ इतना बड़ा आयोजन करने की राज्य की क्षमता को देश के सामने और देश की क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने में सफल रहा है। आपने जो गलत सूचना फैलाने की कोशिश की, वह देश के लोगों के विश्वास को प्रभावित नहीं कर सकती। देश में किसी ने आपकी बातों पर भरोसा नहीं किया। और जल्द ही, जनता आपकी बात सुनना बंद कर देगी।
योगी ने यह भी कहा कि संभल में हम जो कर रहे हैं वह भी आस्था के कारण ही है। उन्होंने कहा कि आज की समाजवादी पार्टी नाम तो डॉ. लोहिया का लेती है लेकिन अपने आदर्शों से दूर हो गयी है। सपा डॉ. लोहिया के आचरण, आदर्श और सिद्धांतों को भूल गयी है। उन्होंने कहा कि विष्णु, शंकर और राम भारत की एकता का आधार हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी इस पर विश्वास नहीं करती है। हम सबके विकास की बात करते हैं। महाकुंभ में भारत की विरासत और विकास की अनूठी छाप देखने को मिली। महाकुंभ में जाति, धर्म या क्षेत्र के आधार पर किसी भी तरह का कोई भेदभाव देखने को नहीं मिला।
लखनऊ एजेंसी। गंगा सिर्फ एक नदी मात्र नहीं है। यह नदी के साथ एक इतिहास और संस्कृति भी है। यह जिस क्षेत्र से गुजरती है उसे हरा भरा कर देती है। यही वजह है कि विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं का यह पालना रही है। इसीलिए इसे जीवनदायिनी कहते हैं। आस्था की वजह से यह मोक्षदायिनी, पतित पावनी और पाप नाशिनी भी मानी जाती है। इन सारी खूबियों के अलावा गंगा का आर्थिक महत्व भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गंगा यात्रा से लेकर प्रयागराज महाकुंभ तक कई बार कह चुके हैं कि गंगा सिर्फ आस्था नहीं अर्थव्यवस्था भी है। अब तो अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ भी इसे मानने लगे हैं। प्रयागराज महाकुंभ में आए और यहां से काशी, अयोध्या, चित्रकूट, विंध्याचल और अन्य जगहों पर जाने वाले श्रद्धालुओं/पर्यटकों की कुल संख्या और उनके द्वारा किए गए अनुमानित खर्च के आंकड़े तथा देश एवं प्रदेश की जीडीपी पर पड़ने वाले असर के आंकड़े अभी और आएंगे। महाकुंभ के समापन के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी ने भी कहा था कि यह आयोजन देश की सांस्कृतिक समृद्धि और आर्थिक प्रगति का प्रतीक बन गया है। इस आयोजन में आए 50 से 60 करोड़ लोगों ने विभिन्न मदो में जो खर्च किया उसका प्रभावशाली असर चौथी तिमाही की जीडीपी में दिखेगा। दरअसल, आस्था और अर्थव्यवस्था एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हों भी क्यों नहीं, विष्णुपुराण में जिस समुद्र मंथन का जिक्र है, उसीसे अमृत भी निकला और समृद्धि की देवी महालक्ष्मी भी निकली थीं। अमृत को असुरों से बचाने के लिए जब देवता अमृत कुंभ लेकर भागे, उस समय प्रयागराज, नासिक, उज्जैन और हरिद्वार में अमृत की कुछ बूंदे छलकी। इनसभी जगहों पर कुंभ और महाकुंभ का आयोजन होता है।