
लखनऊ एजेंसी। यूपी विधानमंडल के बजट सत्र का आज 8वां दिन है। विधानसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय नहीं बढ़ाया जाएगा। फिलहाल इस पर कोई विचार नहीं हो रहा है। पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि आवारा पशुओं से होने वाले हादसों को रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
इसके तहत गोवंश के गले में रेडियम पट्टे लगाए जाएंगे, ताकि वे रात में भी स्पष्ट दिख सकें। मछलीशहर की विधायक रागिनी सोनकर ने कहा कि झांसी में नवजात शिशुओं की मौत का मामला उठाने पर मंत्री ब्रजेश पाठक ने नेता प्रतिपक्ष पर हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सवाल पूछने पर मंत्री आहत हो जाते हैं। अगर मंत्री जी से सवाल नहीं पूछना है, तो मैं उनका बहिष्कार करती हूं। यूपी विधानसभा में इस बार 11 दिन का बजट सत्र है। 20 फरवरी को बजट पेश किया गया था। सदन 5 मार्च तक चलेगा। ह सपा को घड़ियाली आंसू बहाने के अलावा कुछ नहीं आता- केशव मौर्य: विधान परिषद में केशव मौर्य ने कहा- हम किसानों को मुफ्त बिजली दे रहे हैं। समाजवादी सरकार के समय गोवंश की तस्करी होती थी, उनके गालों पर खंजर चलाए जाते थे। इन्हें घड़ियाली आंसू बहाने के अलावा कुछ नहीं आता। समाजवादी सरकार के समय किसानों का ट्रांसफॉर्मर बिना पैसे दिए नहीं बदला जाता था। आज कृषि कार्यों के लिए अलग से फीडर दिया गया है। पहले किसानों को बिना लाठी खाए खाद नहीं मिलती थी। हमारी सरकार की प्राथमिकता लागत को कम करना, उत्पादन में वृद्धि करना और किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाना है। सपा विधायक त्रिभुवन दत्त ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने का मुद्दा उठाया। कहा- महंगाई के मुकाबले उनका मानदेय बहुत कम है। सरकार उनका मानदेय बढ़ाएगी या नहीं? कार्य के हिसाब से भी मानदेय बहुत कम है। ह क्या सरकार मानदेय 6000 से 16000 करने पर विचार करेगी? क्या आजीवन कार्य करने या पेंशन देने पर विचार किया जाएगा? जवाब में महिला विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि सरकार मानदेय बढ़ाने पर विचार नहीं कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय दिया जा रहा है। पेंशन देने पर भी विचार नहीं किया जाएगा।
ह नगर विकास संशोधन विधेयक विधानसभा में पेश सुरेश खन्ना ने विधानसभा में नगर विकास संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया। इस पर सपा विधायक कमाल अख्तर ने कहा- कई प्राधिकरण स्ववित्तपोषित हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी प्राधिकरण हैं, जो अपने कर्मचारियों का वेतन तक देने में सक्षम नहीं हैं। बजट में बीमा: प्राधिकरणों के लिए सहायता और वेतन की व्यवस्था कराई जाए।