
नई दिल्ली एजेंसी। एक राष्ट्र एक चुनाव पर जेपीसी की बैठक संसदीय सौध में आज संपन्न हुई। एक देश एक चुनाव पर जेपीसी के अध्यक्ष बीजेपी सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि यह एक अच्छी मुलाकात थी। सभी सदस्यों का रुख सकारात्मक रहा। सबसे पहले जस्टिस अवस्थी ने प्रेजेंटेशन दिया। उनके बाद पूर्व सीजेआई यूयू ललित ने प्रेजेंटेशन दिया। सभी सदस्यों ने प्रस्तुतियों के लिए उनकी सराहना की। उनके सवालों का जवाब दिया गया। मैं समिति के सभी सदस्यों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने सकारात्मक रवैया दिखाया और राष्ट्रहित में प्रश्न पूछे। शंकाएं दूर हो गईं। हम एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने दावा किया कि ‘‘एक राष्ट्र एक चुनाव’’ (ओएनओई) विधानमंडलों के कार्यकाल के साथ छेड़छाड़ करके लोकतंत्र को कमजोर करेगा और लोगों के अधिकारों का हनन करेगा। सूत्रों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सहयोगी ने हैरानी जताई कि क्या दो चुनावों के बीच पांच साल का अंतराल निर्वाचित प्रतिनिधियों की जनता के प्रति जवाबदेही को कमजोर करेगा? उच्चस्तरीय कोविंद समिति के सचिव आईएएस अधिकारी नितेन चंद्रा ने भी समिति के साथ अपने विचार साझा किये। अवस्थी ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से होने वाली बचत और विकास को बढ़ावा मिलने के लाभों के बारे में विस्तार से बताया। पच्चीस फरवरी की बैठक के लिए संसदीय समिति के एजेंडे को संक्षेप में ‘‘कानूनी विशेषज्ञों के साथ बातचीत’’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में मोदी सरकार ने ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ पर उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था और इसने अपनी रिपोर्ट में इस अवधारणा का जोरदार समर्थन किया था। इसके बाद, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया और सरकार ने लोकसभा में दो विधेयक पेश किये, जिनमें से एक संविधान संशोधन विधेयक भी था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद एवं पूर्व कानून मंत्री पी पी चौधरी की अध्यक्षता में 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति गठित की थी। संसदीय समिति ने मंगलवार की बैठक को छोड़कर अब तक दो बैठकें की हैं, जिनमें अपने एजेंडे का व्यापक विवरण तैयार किया है और परामर्श के लिए हितधारकों और विशेषज्ञों की सूची दी गई है।