
नई दिल्ली एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी फ्रांस के दौरे पर हैं। वहां वो एआई समिट में हिस्सा लेने के लिए गए हुए हैं। वहां से प्रधानमंत्री अपने विशेष विमान में बैठकर वाशिंगटन पहुंचेंगे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का प्लेन अमेरिका में लैंड करता उससे पहले ही उनके दोस्त और अमेरिकीन प्रेसिडेंट ट्रंप ने एक ऐसे आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जिससे भारतीय उद्दोगपति गौतम अडानी के चेहरे खिल उठे होंगे। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने करीब 50 साल पुराने फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट (एपसीपीए) को निलंबित कर दिया है। इससे विदेशों में व्यापार के लिए रिश्वत देना अपराध नहीं रहेगा। यह वही अधिनियम है जिसके तहत उद्योगपति गौतम अडानी पर आरोप लगाया गया है। ट्रंप ने आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि ये कानून वैश्विक मंच पर कंपनियों को नुकसान में डालता है। इसके अलावा, उन्होंने नवनियुक्त अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को एफसीपीए के तहत की गई कार्रवाइयों को तुरंत रोकने का आदेश दिया। इसमें अमेरिकी व्यक्तियों और कंपनियों के मुकदमे शामिल हैं जिन पर न्याय विभाग (डीओजे) ने अन्य देशों में व्यापार हासिल करने के प्रयासों में विदेशी सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप लगाया है। ट्रंप ने कहा कि कागज पर तो ये अच्छा लगता है, लेकिन व्यवहारिक तौर पर यह एक आपदा है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई अमेरिकी किसी विदेशी देश में जाता है और वहां कानूनी रूप से व्यापार करना शुरू कर देता है, तो यह लगभग एक गारंटीकृत जांच अभियोग है, और कोई भी इसके कारण अमेरिकियों के साथ व्यापार नहीं करना चाहता है। आपको बता दें कि एफसीपीए 1977 का एक कड़ा कानून है। जिसे अमेरिकी कंपनियों और नागरिकों को विदेशी सराकरी अधिकारियों को बिजनेस में फायदा उठाने के लिए रिश्वत देने से रोकता है। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय बिजनेस में नैतिकता और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। ट्रंप के इस पर रोक के बाद अडानी ग्रुप को भी बड़ी राहत मिलेगी, जिसके खिलाफ एफसीपीए के तहत ही मामला चल रहा है। आपको बता दें कि एफसीपीए के तहत की गई कार्रवाइयों को तब तक रोकने का आदेश दे रहे हैं, जब तक कि वह नए प्रवर्तन दिशानिर्देश जारी नहीं करती हैं।