
गोरखपुर एजेंसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को ट्रांसपोर्टनगर में 2 करोड़ 17 लाख रुपये की लागत से बनाए गए रैन बसेरा का लोकार्पण किया। लोकार्पण के बाद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन इस बात का ध्यान रखे कि सर्द रात में कोई खुले में न सोए। उन्होंने कहा कि नागरिकों का भी कर्तव्य है, वे भी इस बात का ध्यान रखें। मुख्यमंत्री ने जरूरतमंदों के बीच कंबल भी वितरित किया। इससे पहले तकियाघाट में आयोजित कार्यक्रम में प्राकृतिक विधि से जल शोधन तंत्र परियोजना का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना प्रकृति को बचाने के साथ ही जान बचाने वाली भी है। मुख्यंत्री ने कहा कि शासन-प्रशासन ने आश्रय गृहों की व्यवस्था दी है। खुले आसमान के नीचे, सड़क के किनारे फुटपाथ पर कोई न सोने पाए। यह देखना जनप्रतिनिधियों व नागरिकों की भी जिम्मेदारी है। यदि कोई बाहर से आा है, आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति है, मानसिक रूप से अस्वस्थ है, काम की तलाश में शहर आया मजदूर है तो उसे आश्रय गृहों में पहुंचाने की पहल करनी चाहिए। भीषण सर्दी, गर्मी, बाढ़ के समय उपयोगी साबित होते हैं आश्रय गृह: मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के समय, भीषण सर्दी, बाढ़, गर्मी जैसी स्थितियों में आश्रय गृह काफी उपयोगी होते हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पुलिस व प्रशासन तो इसकी जिम्मेदारी उठा ही रहे हैं, समाज के लोगों को भी देशके दुश्मनों से सावधान रहना होगा। अंतिम पायदान के व्यक्ति तक सुविधा पहुंचाने को प्रयत्नशील सरकार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में अंतिम पायदान के व्यक्ति तक सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास होना चाहिए। सरकार इस दिशा में प्रयत्नशील है। सरकार का यह संकल्प है कि भीषण शीतलहर में कोई भी व्यक्ति खुले में सोने और ठंड से ठिठुरने को मजबूर न हो। इसके लिए आश्रय गृहों की व्यवस्था, कंबल वितरण सहित सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में जरूरतमंद लोगों को भीषण ठंड से बचाने के लिए राजस्व विभाग के माध्यम से सभी जिलों को कंबल वितरण के लिए पर्याप्त धनराशि जारी की गई है। हर जिले में जनप्रतिनिधियों के सहयोग से पर्याप्त संख्य में कंबल वितरण हो रहे हैं। इसमें धर्मार्थ संस्थाएं भी आगे आई हैं। यह सबकी जिम्मेदारी होती है कि हम हर जरूरतमंद व्यक्ति की विपत्ति में उसके साथ खड़े रहें। सीएम योगी ने कहा कि कुछ दिनों तक शीतलहर का यह दौर जारी रह सकता है। ऐसे में हमें स्वस्थ जीवन के लिए सबको सावधानी और बचाव के उपायों के प्रति लोगों को प्रेरित करने की जरूरत है। रैन बसेरे के लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सानिध्य में करीब 1000 लोगों के बीच कंबल और भोजन के पैकेट वितरित किए गए। कई लोगों को मुख्यमंत्री ने खुद अपने हाथों से कंबल और भोजन के पैकेट प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने बच्चों को चॉकलेट और दुलार कर आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि यहां जो लोग भी कंबल पाने से बच जाएं, उनके नाम नोट कर लिए जाएं। कार्यक्रम के बाद उन तक भी कंबल पहुंचना सुनिश्चित किया जाए।
व्हीलचेयर पर बच्चे को देख भावुक हो गए सीएम योगी: कंबल वितरण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजर मेवातीपुर से आई अनीता रानी और उनके साथ व्हीलचेयर पर बैठे उनके पुत्र 11 वर्षीय अर्जित पर पड़ी। बच्चे को देखकर वह भावुक हो गए। उन्होंने पूछा कि बच्चे को क्या हो गया है? अनीता ने बताया कि बचपन से ही न्यूरो की समस्या होने से अर्जित चल फिर या बोल नहीं पाता है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टर को दिखाइए, इलाज कराइए। हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। प्राकृतिक विधि से जल शोधित करने से करोड़ों की बचत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुबह नगर निगम की ओर से तकियाघाट पर विकसित प्राकृतिक विधि से जल शोधन तंत्र परियोजना का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इस विधि से जल शोधित करने से नदियों का पानी तो शुद्ध होता ही है, करोड़ों की बचत भी होती है। इस विधि से जल शोधन कर प्रकृति के साथ जीवन बचाने का भी कार्य होता है। दूषित जल से 50 हजार मासूम हुए बीमार मुख्यमंत्री ने कहा कि महापुरूषों ने जल को जीवन माना है। प्रदूषित जल के कारण गोरखपुर के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1977 से लेकर 2017 तक 50 हजार मासूम बच्चे इंसेफेलाइटिस एवं वेक्टरजनित बीमारियों के कारण काल के गाल में समा गए। विषाणुजनित बीमारियों से होने वाली मौतों का कारण प्रदूषित जल और गंदगी था। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से स्वच्छ भारत मिशन पूरे देश में लागू हुआ। हर व्यक्ति को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए शहरी क्षेत्र में अमृत मिशन और ग्रामीण क्षेत्र में जल जीवन मिशन प्रारम्भ हुआ। हर घर नल योजना के माध्यम से घर-घर तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का कार्य किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज नामामि गंगे परियोजना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से नदी संस्कृति को बचाने का कार्य प्रारम्भ किया गया है। आज उसका परिणाम है कि दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक व आध्यात्मिक समागम उत्तर प्रदेश की धरती प्रयागराज में मां गंगा, यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी पर महाकुम्भ के रूप में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में भी हमारी सभ्यता एवं संस्कृति नदी के तट पर बसी है। गोरखपुर राप्ती नदी व रोहिन नदी के तट पर बसा है। जो नदी हमारी सभ्यता व संस्कृति की जननी है,उसे शुद्ध करने का कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राप्ती नदी में प्रदूषित पानी गिरने के कारण पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नगर निगम पर लगातार जुर्माना कर रहा था। नगर निगम ने 110 करोड रुपये की लागत से एसटीपी बनने की तैयारी की थी। तब हमने कहा कि जल शोधन के लिए प्राकृतिक तरीका अपनाया जाए। आज उसका सुखद परिणाम सबके सामने है।
पहले यहां पानी का बीओडी (बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) लेवल 350 तक पहुंच गया था और खतरनाक जहर से भी बदतर होकर वह खेतों में सिंचाई के लायक भी नहीं था। प्राकृतिक विधि से जल शोधन के बाद अब बीओडी लेवल शुद्ध स्थिति में आ गया है। इस परियोजना में अंतिम छोर पर गिरने वाले पानी का बीओडी लेवल 22 आया है। सिर्फ एक बार का खर्च और फिर बचत ही बचत सीएम योगी ने कहा कि प्राकृतिक विधि से जल शोधन की इस परियोजना में सिर्फ एक बार 2 करोड़ 70 लाख रुपये लगे हैं। और, अब इससे करोड़ों रुपए की बिजली और मेंटिनेंस खर्च की बचत होगी। उन्होंने कहा कि इस विधि को और भी अच्छे ढंग से आगे बढ़ा सकते हैं। यह सतत विकास का एक मॉडल है। इसको हम हर नाले के साथ जोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सभी ड्रेनेज और सीवर से जुड़े हुए जितने भी नाले हैं, उन सबको इसी रूप में आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे तो एक प्राकृतिक मॉडल के माध्यम से कम खर्चे में बेहतर परिणाम देकर जीवन की सबसे बुनियादी आवश्यकता जल की शुद्धता को बनाये रखने में हम सफल हो पायेंगे। सीएम ने दिए सुझाव इस परियोजना का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री ने नगर निगम को सुझाव भी दिए। नगर आयुक्त ने विभिन्न चरणों में जल कैसे साफ हो रहा है, यह पानी की अलग-अलग स्थितियों के जरिए मुख्यमंत्री को बताया। उन्होंने कहा कि यहां से ढाई किलोमीटर दूर पानी काफी साफ हो जाता है। इसपर मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इतना लंबा जाने की जरूरत नहीं है। बरसात में यहां पानी भर जाएगा। उन्होंने कहा कि हार्बर्ट बांध के साथ एक तटबंध बनाइए और वहां एक पांड का निर्माण करिए। उसमें बोल्डर, जाली, कंकरीट, मोटा बालू, पतला बालू आदि बिछाइए। उसमें दो ड्रेन बनाइए। एक-एक महीने दोनों को अलग-अलग चलाइए। नालों को उससे गुजारिए तो पानी और साफ होगा। बीओडी 10 आ जाएगा। साफ पानी जमीन में भी अवशोषित होगा और लोग सब्जियों आदि की सिंचाई भी कर सकेंगे। ऐसे कार्य कर रही परियोजना तीन किमी लम्बा तकियाघाट नाला हार्बर्ट बांध इलाहीबाग रेगुलेटर से हनुमानगढ़ी मंदिर, तकियाघाट होते हुए राजघाट के पास राप्ती में गिरता है। यह लगभग 15 मोहल्लों से होकर गुजरता है। इस नाले के पानी को पर्यावरणविद् प्रोफेसर सीआर बाबू की सलाह पर प्राकृतिक विधि से शोधित किया जा रहा है। राप्ती में इस नाले से रोजाना करीब 200 एमएलडी नाले का पानी शोधित होकर गिर रहा है। नाले की ड्रेजिंग कर तलहटी में बोल्डर पिचिंग की गई है। नाले के दोनों तरफ कच्चा बांध बना उस पर सड़क बनाई गई है। नाले में आने वाले गंदे पानी को फिल्टर करने के लिए प्रत्येक 50 से 90 मीटर दूरी पर 34 राक फिल्टर (गैबियन) और पत्थर की चिनाई वाली दीवारें बनाई गई हैं। रॉक फिल्टर के बीच के हिस्सों में जलीय पौधे लगाए गए हैं। पत्थरों को एल्युमीनियम के तार से बांधा गया हैं। इसके अतिरिक्त तकियाघाट नाले से जुड़े सभी नालों के जुड़ाव स्थल पर ह्यूम पाइप डालकर पत्थर की चिनाई कर दर्जन भर चेक डैम बने हैं ताकि पानी फिल्टर होकर मुख्य नाले में जाए। प्लास्टिक और पॉलीथिन को रोकने के लिए लोहे की जालियां लगाई गईं हैं।