
मेरठ हीरा टाइम्स ब्यूरो। भामाशाह पार्क में चल रहे पांच दिवसीय मेरठ महोत्सव का समापन हो गया। आसमान में रंग बिरंगी रोशनी धमाकेदार डीजे की धुन पर खुले आसमान के नीचे को मेरठ महोत्सव का महोत्सव का उद्घाटन पर्यटन मंत्री द्वारा किया गया । महोत्सव के आखिरी दिन पदमश्री सिंगर शंकर महादेवन ने अपनी आवाज से धमाल मचा दिया। कार्यक्रम की शुरुआत वक्रतुंड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभः निर्विघ्नम कुरु मे देव से हुई। जिसके बाद पहले गाने के रूप मे एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि गजेशानाय जा भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि गणेश वंदना से शुरुआत हुई। मेरठ को शिव की नगरी कहकर सम्बोधित करते हुए शिव तांडव स्त्रोत पर ऊँःनमः शिवाय व हर-हर महादेव के जयकारों के साथ पूरा भामाशाह पार्क भक्तिमय कर दिया। इस दौरान शंकर महादेवन ने कहा कि मैं मेरठ का ऋणी हूं, मेरठ से गहरा नाता है, क्योंकि यहीं के बने हुए तानपूरे से पहली बार रियाज किया था। मेरठ महोत्सव में प्रस्तुति देने पहुंचे शंकर महादेवन कार्यक्रम से पहले उन्होंने दिल्ली रोड स्थित गॉडविन होटल में पत्रकारों से बातचीत की। महादेवन ने कहा कि मेरठ में पहली बार अपनी प्रस्तुति देने के लिए आया हूं। मैं अभिभूत हूं। उन्होंने कहा कि गानों के अलग-अलग पहलू होते है। ऐसा कई बार होता है कि फिल्म से ज्यादा उसके गीत सदियों तक याद रखे जाते है। जैसे कि भाग मिल्खा भाग, तारे जमीन पर, मां, शिव तांडव स्त्रोत, गणेश वंदना व उनका सिंग्नेचर सांग ब्रेथलेस्स आदि। ऐसी कई फिल्में हैं जिनको फिल्मों के साथ-साथ उनके गानों के लिए भी याद किया जाता है । फिल्मों का ट्रेंड बदलता रहेगा मगर गाना एक ऐसी चीज है जिसका दौर हमेशा स्थाई रहेगा। बता दे कि शंकर महादेवन 10 से अधिक भाषाओं में आपने गाने दे चुके हैं। या जिनमें तमिल, तेलगु, कन्नड़, ओरिया, र बंगाली, आसामी, पंजाबी, गुजराती,मराठी, श्रीलंकाकन आदि है।