
मेरठ हीरा टाइम्स ब्यूरो। क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल की जन्मस्थली ग्राम पांचवी खुर्द में तस्वीर सिंह चपराना के आवास पर राष्ट्रीय प्रबुद्ध बौद्धिक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। संगोष्ठी में कार्यक्रम के अध्यक्ष अंतराम तंवर ने कहा की सामाजिक समरसता भारतीयता की पहचान है और गुर्जर समाज जम्मू कश्मीर से महाराष्ट्र तक विभिन्न नाम में जैसे कुर्मी कुर्मी पाटीदार आदि में के नाम से रहता है। यह वह समाज है जो सर्व समाज को अपने साथ लेकर चलने की क्षमता रखता है । सर्व समाज उसकी इस विशेषता का सम्मान करता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुजरात सरकार के पूर्व गृहमंत्री गोवर्धन भाई झडपिया ने कहा कि भारत का सही इतिहास लिखा जाना चाहिए । यदि सही इतिहास लिखा गया तो क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल जैसे अनेक क्रांतिकारियों को इतिहास में वह स्थान मिलेगा जिसके वह हकदार है। उन्होंने आगे कहा है कि दुनिया में भारत के सिवाय ऐसा कोई देश नहीं है जो अपनी भूमि को माता कहता हूं । भारत का स्वाभिमान और संस्कृति को जिंदा रखना ही हमारा कर्तव्य है। भारत धनसिंह कोतवाल जैसे वीरों के कारण आजाद हुआ है। यह स्वाभिमान का विषय है कि भारत के वीरों ने कभी पीठ नहीं दिखाई। आज हमें यदि विद्यालयों में शिक्षा सीखनी है तो अंग्रेजी शिक्षा सीखें, लेकिन अंग्रेजीयत में ना आए। मैं सरकार से मांग करूंगा की धनसिंह कोतवाल के नाम पर किसी सड़क का नामकरण हो ताकि उसे क्रांतिकारी के नमन करने के लिए एक यादगार खाका तैयार हो। अति विशिष्ट अतिथि सतीश भाई पटेल ने कहा कि सामाजिक समरसता आर्थिक उत्थान के लिए एक नई आर्थिक मॉडल पर काम करना होगा। यह नया आर्थिक मॉडल ही युवाओं को रोजगार देने का कार्य करेगा। युवाओं को रोजगार से जोड़ना सच्ची सामाजिकता है और यही सच्ची देशभक्ति है । धनसिंह कोतवाल को नमन करने के लिए हमें रोजगार उत्पन्न करने होंगे। कार्यक्रम अध्यक्ष चौधरी अंतराम तवर ने कहा की 1857 की क्रांति में हमारे दिल्ली के गांव भी धन सिंह कोतवाल जी के साथ मिलकर लड़े थे । मै तीगरी गांव का रहने वाला हूं और 1857 की क्रांति में धन सिंह कोतवाली के आह्वान पर हमारे गांव के क्रांतिवीरों ने भी प्राणों की आहुति थी। कार्यक्रम संयोजक धनसिंह कोतवाल के प्रपोत्र तस्वीर सिंह चपराना ने विस्तार से बताया कि बाबा धनसिंह कोतवाल ने 1857 की क्रांति में किस तरह से भारतीय सिपाहियों, देसी जनता और पुलिस को एकजुट करके अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने का काम किया और दो जेलों को तोड़ा, जिसमें 836 कैदी बंद थे । धनसिंह कोतवाल जी की सच्ची श्रद्धांजलि सरकार को किसी विश्वविद्यालय के नाम धन सिंह कोतवाल पर रखा जाना चाहिए। जिससे कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्रा धनसिंह कोतवाल के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉक्टर कलम सिंह, ,रामपाल सिंह पूर्व प्रधानाचार्य नीरज पाल राष्ट्रीय महामंत्री सपा, प्रधानाचार्य देशपाल, प्रधानाचार्य संजीव नागर, बले सिंह, कैप्टन सुभाष चंद्र ने अपने विचार रखें।कार्यक्रम में वेदपाल जिला कमांडेंट, वेद प्रकाश पूर्व डायरेक्टर खाड़ी, राजबल सिंह,जगत दोसा, सचिन अंबावता, लव कुमार कुंडा, रॉबिन गुर्जर, इंजीनियर सुरेंद्र सिंह, अध्यक्ष चमन सिंह, अध्यक्ष सुभाष चंद्र उपस्थित हुए।