
लखनऊ एजेंसी। यूपी भाजपा ने रविवार को 70 जिलों में जिलाध्यक्ष की घोषणा कर दी। कई जिलों में विरोध, गुटबाजी और नेताओं के दबाव के चलते ऐन वक्त पर चुनाव टाल दिया गया। इन जिलों में पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी, प्रदेश चुनाव प्रभारी महेंद्रनाथ पांडेय का संसदीय क्षेत्र चंदौली और डिप्टी सीएम केशव मौर्य का गृह जनपद कौशांबी भी शामिल हैं। 70 जिलाध्यक्षों में से 44 नए चेहरे हैं। 5 महिलाएं हैं और 26 को दोबारा मौका दिया गया। हालांकि, भाजपा में लंबे समय बाद ऐसा देखने को मिला कि जब प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए एकमत नहीं हो सका। इस तरह से नाराजगी रोकने में सफल रही भाजपा: जिलों में भाजपा के नए अध्यक्ष की घोषणा करने से हंगामा और विरोध-प्रदर्शन होने की आशंका थी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने माहौल खराब होने से रोकने के लिए मजबूत रणनीति बनाई। चुनाव पर्यवेक्षक के साथ एक-एक वरिष्ठ पदाधिकारी, प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद या पूर्व मंत्री को जिलों में भेजा गया। पार्टी ने सभी जिलों में जिलाध्यक्ष नियुक्ति के लिए आयोजित बैठक का लाइव कवरेज कराया। महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने माहौल खराब होने से रोकने के लिए खुद मॉनिटरिंग की। जिले में बैठक से पहले ही ऐलान कर दिया गया कि इसका सीधा प्रसारण धर्मपाल सिंह खुद देख रहे हैं। धर्मपाल ने प्रदेश मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम में बैठक कर एक-एक जिले में नियुक्ति की घोषणा को लाइव देखा। बैठक के लाइव कवरेज और उस पर धर्मपाल सिंह की नजर के कारण कहीं भी विरोध नहीं हुआ। द सहारनपुर में प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री ब्रजेश सिंह और राज्यमंत्री जसवंत सैनी के बीच खींचतान के कारण जिलाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी। द अलीगढ़ जिला और महानगर में सतीश गौतम और विधायक जयवीर सिंह, राजवीर सिंह राजू भैया के बीच सहमति नहीं बनने से चुनाव नहीं हुआ। द बागपत में पूर्व सांसद सतपाल सिंह, विधायकों की खींचतान के कारण जिलाध्यक्ष की नियुक्ति पर निर्णय नहीं हो सका। द हापुड़ में सतेंद्र सिसोदिया और विधायकों के बीच खींचतान के कारण जिलाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई। द शामली में पूर्व मंत्री सुरेश राणा और प्रदेश उपाध्यक्ष मोहित बेनीवाल के बीच जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर खींचतान के कारण चुनाव नहीं हो सका। एटा में विधायक विपिन वर्मा डेविड और पूर्व सांसद राजवीर सिंह राजू भैया के बीच सहमति नहीं बनी। राजू भैया चुनाव स्थगित कराने में सफल रहे।
द हाथरस में सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि और विधायक अंजुला महावर के बीच जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर विवाद के चलते निर्णय नहीं हो सका। द पीलीभीत में केंद्रीय राज्यमंत्री और स्थानीय सांसद जितिन प्रसाद और प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री संजय गंगवार के बीच सहमति नहीं बनने के कारण चुनाव नहीं हो सका। द जालौन में किसी एक नाम पर सहमति नहीं बनने से जिलाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी। कुछ नेता मौजूदा जिलाध्यक्ष उर्विजा दीक्षित को हटाना चाहते हैं।
द हमीरपुर में जातीय समीकरण सेट करने के कारण जिलाध्यक्ष चुनाव होल्ड किया गया है। द फतेहपुर में चुनाव प्रक्रिया अंतिम दौर में शुरू हुई। अभी मंडल अध्यक्ष की घोषणा भी नहीं हुई है। पहले मंडल अध्यक्ष नियुक्त होंगे उसके बाद जिलाध्यक्ष की नियुक्ति होगी। पहले जानते हैं किन जिलों में है विवाद द अयोध्या जिला और महानगर में पूर्व सांसद लल्लू सिंह अपने करीबी को जिलाध्यक्ष बनाना चाहते हैं। वहीं, पार्टी कैडर के किसी कार्यकर्ता को मौका देना चाहती है। लल्लू सिंह मौजूदा जिलाध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव को हटवाना चाहते हैं। द लखीमपुर खीरी में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी और स्थानीय विधायकों के बीच जिलाध्यक्ष को लेकर सहमति नहीं बनने के कारण चुनाव स्थगित हुआ। लखीमपुर की रेखा वर्मा खुद केंद्रीय चुनाव समिति की अपील अधिकारी हैं। द बाराबंकी में मौजूदा जिलाध्यक्ष अरविंद मौर्य का कामकाज ठीक माना जाता है। लेकिन लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद से स्थानीय जनप्रतिनिधि अरविंद की जगह किसी नए चेहरे को मौका देना चाहते हैं। द अंबेडकर नगर में जिलाध्यक्ष त्रयंबक तिवारी के व्यवहार से स्थानीय जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता नाराज हैं। ज्यादातर कार्यकर्ता बदलाव चाहते हैं। लेकिन त्रयंबक तिवारी को दिल्ली के नेताओं का आशीर्वाद प्राप्त है। तिवारी ने अपने दिल्ली के संपर्कों का इस्तेमाल कर चुनाव फिलहाल स्थगित करा दिया है। द गोरखपुर क्षेत्र के सिद्धार्थनगर में 25 में से 5 ही मंडल अध्यक्ष नियुक्त हुए। जिलाध्यक्ष चुनाव के लिए कम से कम 13 मंडल अध्यक्ष नियुक्त होने चाहिए। मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति में सांसद और विधायकों के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष के बीच भी सहमति नहीं थी। द देवरिया में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर सांसद शशांक मणि और स्थानीय विधायकों के बीच सहमति नहीं बनी। देवरिया में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापतिराम त्रिपाठी भी करीबी को जिलाध्यक्ष बनाना चाहते हैं। द झांसी में भाजपा के वर्तमान जिलाध्यक्ष हेमंत परिहार को लेकर भी विवाद है। स्थानीय नेता और कार्यकर्ता हेमंत के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन प्रदेश के एक-दो बड़े पदाधिकारी हेमंत को ही रिपीट करना चाहते हैं।