
मेरठ हीरा टाइम्स ब्यूरो। हर सुविधा का दुरुपयोग किया जा सकता है, ऐसे में हम सुविधाओं का इस्तेमाल करना बंद नहीं देते, बल्कि सुरक्षा का ख्याल रखते हैं। साइबर सुविधाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है इसलिए साइबर जगत से जुड़ी वारदात भी लगातार बढ़ती जा रही हैं। खासकर कोरिया और दूसरे देशों से डाटा के जरिए भारत और दुनिया भर में लगातार साइबर हमले किए जा रहे हैं। महाकुंभ में भी कमरे दिलाने से लेकर बुकिंग और रजिस्ट्रेशन के नाम पर साइबर ठगी की कोशिशें की जा रही हैं। मगर इन मामलों से बचाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस पूरी तरह सजग है और साइबर पैट्रोलिंग के जरिए इन फेक वेबसाइट्स को चौक किया जा रहा है। एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि डीआईजी कलानिधि नैथनी ने ये विचार रखे।
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरुकता माह में आईआईएमटी विश्वविद्यालय में ‘साइबर सेफ उत्तर प्रदेश’ अभियान के तहत एक दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया गया। आईआईएमटी विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार में आयोजित वर्कशॉप में डीआईजी कलानिधि नैथनी ने साइबर क्राइम के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के दुरुपयोग की जानकारियां साझा की। गौर तलब है कि डीआईजी बनने से पहले कलानिधि भाभा एटोमिक सेंटर में वैज्ञानिक के रह चुके हैं और आईटी मामलों के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधियों के हौंसले बुलंद हैं और लगातार दुनिया पर साइबर हमले किए जा रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों को देखते हुए मोबाइल या साइबर दुनिया पर भरोसा बिलकुल बंद कर देना चाहिए और किसी भी आपातकालीन हालात में जरा सा भी संदेह होने पर पहले संबंधित व्यक्ति से आमने सामने बात करने का प्रयास करें। किसी भी साइबर फ्रॉड के सामने आने पर 1930 नंबर पर नेशनल साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराया जा सकता है।
वर्कशॉप के चीफ मेंटोर और पूर्व आईपीएस प्रोफसर त्रिवेणी सिंह ने बताया कि भारत में एम्स के सभी सिस्टम्स को साइबर अटैक के बाद काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ चुका है। वहीं लंदन के रेलवे सिस्टम और नासा के ऑर्बिट को हैक किया जा चुका है। डीप फेक के जरिए डिजिटल अरेस्ट, वर्चुअल किडनैपिंग आदि के कुछ मामले साझा करते हुए साइबर अपराधों के नए नए उदाहरण बताए। अपराधी साइबर एक्टिव होते जा रहे हैं और इस तरह के अपराधों में बढ़ोत्तरी ही आशंका है। लिहाजा फ्यूचर केयर रिसर्च फाउंडेशन के तहत वो पुलिस कर्मियों और आम जनता को इस बारे में सचेत करने में लगे हैं। साइबर ठगी से बचने के लिए उन्होंने फ्री गिफ्ट या साइबर फीयर से बचने की सलाह दी। छात्रों को साइबर लॉ या साइबर क्राइम एक्सपर्ट के क्षेत्र में करियर बनाने की सलाह देते हुए उन्होंने बताया कि छात्रों को बाकी कोर्स के साथ साइबर से जुड़े पाठ्यक्रम भी लेने चाहिए। इस क्षेत्र में भविष्य में बेहतर करियर बनाया जा सकता है। साइबर ठगी से बचने के लिए निजी कंपनियों के अलावा पुलिस, सीबीआई, आईडी आदि में साइबर एक्सपर्ट की जरुरत बढ़ती जा रही हैं। इससे पूर्व आईआईएमटी विश्वविद्यालय के प्रति-कुलाधिपति डॉ मयंक अग्रवाल ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित करते हुए अभिवादन किया। उन्होंने बताया कि छात्रों को समय-समय पर साइबर मामलों के बारे में जानकारी देने के लिए विशेक्षज्ञों को बुलाया जाता रहा है। प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने आईआईएमटी इंजीनियरिंग कॉलेज में आईटी सुरक्षा लैब का भी उद्घाटन किया। स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के डायरेक्टर धीरेंद्र कुमार ने आईआईएमटी में साईबर सुरक्षा पर समर और विंटर कोर्स कराए जाएंगे।