
मेरठ हीरा टाइम्स ब्यूरो। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर सदर मेरठ में भागवत कथा श्रवण कराते हुए डॉ .रामप्रकाश शास्त्री ने सुदामा चरित ,श्री दत्तात्रेय चरित, उधव की विदाई , द्वारिका लीला वर्णन, द्वारिका का समुद्र में विसर्जन, सम्पूर्ण भागवत का सार कथा का रहस्य , कलि धर्म निरूपण , क्षमा दान महिमा का वर्णन करते हुए कहा कस्तूरी की क्यारी करी ,केसर की ,दी खाद पानी दिया ,गुलाब जल ,रही प्याज की प्याज। उन्होंने कहा कि प्राण और प्रकृति प्राणी के साथ-साथ जाते हैं ।
केवल मनुष्य शरीर ऐसा है । जिसमें प्रकृति (स्वभाव) को सुधारा जा सकता है । ईश्वर के नाम का चिंतन करते हुए पीड़ितों के हृदय में विराजमान प्रभु को प्रसन्न करने की चेष्टा करनी चाहिए। असहाय लोगों के आंखों के आंसू पोंछने से बढ़कर भला दूसरा सत्कर्म क्या होगा। ईमानदारी की कमाई से जीवन यापन करते हुए उसके एक अंश से भी किसी के अंधेरे घर में उजाला करने का भरसक प्रयास करें तो जीवन सफल हो जाएगा। सुदामा चरित्र की कथा सुनाते हुए बताया कि धनवान से धनवान की मित्रता होती है, लेकिन धनवान और निर्धन की मित्रता सुनने को नहीं मिलती लेकिन द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने मित्रता की एक उदाहरण प्रस्तुत किया । श्री कल्कि भगवान के प्राकट्य की कथा तथा संपूर्ण भागवत का सार सुनाया। कथा में अतुल अग्रवाल, कमल जायसवाल ,अनीता जायसवाल,डॉ नरेश चन्द्र शर्मा, बलराम यादव ,डॉ वन्दना गर्ग, विनोद उपाध्याय, लक्ष्मीनारायण जिन्दल ,अजय अग्रवाल ,संजीव अग्रवाल,योगेन्द्र ऐलन ,नीना शर्मा,पंडित उमेश शास्त्री, हिमांशु शास्त्री,दयाशंकर शास्त्री, अविनाश मिश्रा मौजूद रहे।