
मेरठ। नगर निगम ने शहरवासियों को बड़ी राहत देते हुए गृहकर पर मिलने वाली 20 प्रतिशत की छूट की अवधि बढ़ा दी है। अब भवन स्वामी 31 जनवरी तक छूट के साथ हाउस टैक्स जमा कर सकेंगे। महापौर के निर्देश पर यह फैसला लिया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग कर जमा कर सकें और निगम अपने राजस्व लक्ष्य के करीब पहुंच सके।
नगर निगम को सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन 10 से 15 लाख रुपये तक गृहकर वसूली होती है, वहीं वर्ष 2025 के अंतिम दिन एक ही दिन में 1.10 करोड़ रुपये से अधिक कर जमा हुआ। इसके साथ ही 133 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य के मुकाबले अब तक करीब 50 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अभी तीन महीने शेष हैं, जिनमें शेष 83 करोड़ रुपये की वसूली निगम के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नगर निगम ने वार्डवार समाधान शिविर लगाने की योजना बनाई है। नए साल में इन शिविरों के माध्यम से मौके पर ही गृहकर से जुड़ी आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा और स्वकर फार्म भरवाए जाएंगे। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने कर अनुभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिविरों की जानकारी पहले से सार्वजनिक की जाए, ताकि लोग तय समय और स्थान पर पहुंचकर इसका लाभ ले सकें।
नगर निगम द्वारा जीआईएस आईडी एप को भी सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे लोग अपने मकान या दुकान का पुराना और वर्तमान गृहकर विवरण देख सकेंगे। इसके साथ ही कर की दरें भी आम जनता के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। स्वकर फार्म के साथ कर दरों की सूची भी दी जाएगी, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एस.के. गौतम के अनुसार, वर्ष के अंतिम दिन 2450 भवन स्वामियों ने ऑनलाइन और कैश काउंटर के माध्यम से 1.10 करोड़ रुपये का गृहकर जमा किया। कर अनुभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब एक लाख लोग अपना गृहकर जमा कर चुके हैं। नगर निगम के 90 वार्डों में जीआईएस सर्वे के अनुसार लगभग 3.05 लाख आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां हैं, जिनमें से करीब दो लाख भवन स्वामियों से अभी कर वसूली बाकी है।
कर भुगतान को आसान बनाने के लिए नगर निगम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में 10 कैश काउंटर भी खोल दिए हैं। सरस्वती लोक दिल्ली वाहन डिपो, सूरजकुंड वाहन डिपो, गगोल रोड और पल्लवपुरम सहित कई स्थानों पर काउंटर सक्रिय किए गए हैं।
इस बीच, राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने नगर निगम पहुंचकर कहा कि प्रदेश में सबसे कम गृहकर की दरें मेरठ नगर निगम की हैं और वर्ष 2003 के बाद से इनमें वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने व्यवस्था में पारदर्शिता लाने, जीआईएस एप और कर दरों को सार्वजनिक करने तथा गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि गृहकर को लेकर यदि किसी भवन स्वामी को आपत्ति है तो वह शिविरों या निगम कार्यालय में आकर समाधान करा सकता है। सत्यापन के बाद जरूरत पड़ने पर बिलों में संशोधन किया जाएगा। निगम का दावा है कि अगले तीन महीनों में लक्ष्य हासिल करने के लिए वसूली अभियान को और तेज किया जाएगा।
