लखनऊ एजेंसी। 11 जुलाई से कांवड़ यात्रा प्रारंभ हो जाएगी। प्रदेश सरकार यात्रा को लेकर बेहद अलर्ट है। अधिकारियों को हर समय चौकस रहने और संवदेनशील इलाकों में व्यवस्था बनाए रखने की पठकथा तैयार कर ली गई। ऐसे में तमाम हिंदू संगठन भी एक्टिव हो गया है। पश्चिम यूपी के जिलों में संगठन के कार्यकर्ता हाइवों पर आने वाले तमाम ढाबे होटल पर क्यूआर कोड के नाम से नाम पता पूछ रहे हैं। इसको लेकर प्रदेश में सियासत गरमा रही है। बताते चले कि मेरठ से मुजफ्फरनगर कांवड़ रूट पर विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने रेस्टोरेंट, दुकान और ढाबों पर पहुंचकर नाम और धर्म पूछना शुरू कर दिया। वे वाराह (विष्णु के अवतार) की तस्वीर भी इन दुकानों पर चस्पा कर रहे हैं। भगवा झंडे लगा रहे हैं, क्यूआर कोड स्कैन करके देख रहे हैं कि हिंदू नाम की दुकान को कोई दूसरे धर्म का व्यक्ति तो नहीं चला रहा है। मेरठ के हाईवे की दुकानों पर भी पदाधिकारी पहुंच रहे। देख रहे कि बोर्ड किस नाम का और इसे चला कौन रहा है? सही पहचान बताई जा रही है या नहीं? मांसाहार तो नहीं परोसा जा रहा है? पूरी तरह से संतुष्ट होने के बाद विहिप पदाधिकारी इसको अपने रिकार्ड में नोट भी कर रहे हैं। कांवड़िए बोले- जहां ठहरते हैं, वहां नाम देखते हैं: स्थितियों को समझने के लिए दैनिक भास्कर एप टीम नेशनल हाईवे-58 पर पहुंची। हरिद्वार से जल लेकर दिल्ली जा रहे कांवड़ियों से मुलाकात हुई। दुकानों पर नेम प्लेट के आदेश को लेकर हमने बातचीत की। दिल्ली के कांवड़िए कमल कहते हैं- हम 16 जून को हरिद्वार के लिए चले थे। ताकि कांवड़ अपवित्र न हो: विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता अनुज कहते हैं- दुकानों पर नेम प्लेट होना, ये कोई फरमान जैसा नहीं है, ये हिंदुओं के मान सम्मान के लिए जरूरी है। मुस्लिम लव जिहाद, वोटर जिहाद, लैंड जिहाद, फूड जिहाद कर रहे हैं। उन्हें सिर्फ चेतावनी देने के लिए हम दुकान-दुकान पहुंच रहे हैं। कोर्ट की रोक, आदेशों की हो रही अवहेलना: सरकार के इस आदेश को चुनौती देने के लिए कुछ याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। 22 जुलाई 2024 को अदालत ने यूपीसरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा- दुकानदार केवल अपने भोजनालयों में परोसे जा रहे भोजन की किस्म का ही प्रदर्शन कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक के 2 महीने बाद, मुख्यमंत्री योगी ने 24 सितंबर 2024 को एक और आदेश जारी कर दिया। इस बार राज्यभर के सभी भोजनालयों के लिए मालिकों, प्रबंधकों और कर्मचारियों के नाम-पते अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करना जरूरी किया गया। आदेश में कहा गया कि खाने-पीने में मिलावट की घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस होगा। ब्ब्ज्ट लगाने होंगे। शेफ और वेटर को मास्क-ग्लव्स पहनना जरूरी कर दिया गया। साथ ही सभी कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन अभियान चलाया गया।
