मेरठ वरिष्ठ संवाददाता। सोमवार को एमडीए और विद्युत विभाग के अधिकारियों की लापरवाही एक बड़े हादसे का कारण बन गई। विद्युत विभाग को सूचना दिए बिना लिसाड़ी गेट क्षेत्र स्थित अवैध कॉलोनी में पहुंची मेडा की टीम ने बिजली के खंभों को हटाना शुरू कर दिया। नतीजा यह रहा कि 11 हजार की हाई वोल्टेज लाइन से जेसीबी टच होते ही एमडीए के कई कर्मचारी करंट की चपेट में आ गए। हादसे में जेसीबी चालक की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि अन्य कर्मचारियों ने भाग कर अपनी जान बचाई। घटना के बाद मौके पर हड़कंप मच गया। वहीं, एमडीए के अधिकारी भी मामला बिगड़ता देख रफूचक्कर हो गए। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस द्वारा जेसीबी चालक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। हादसे के बाद अभी किसी अधिकारी का बयान सामने नहीं आया है। दरअसल लिसाड़ी गेट क्षेत्र में समर गार्डन कॉलोनी के पास कुछ बिल्डरों ने अवैध रूप से मदीना कॉलोनी फेस टू का निर्माण किया है। जिसमें अवैध रूप से बिजली के खंभे लगाकर विद्युत आपूर्ति भी शुरू कर दी गई है। सोमवार को मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारी इस अवैध कॉलोनी में बिजली के खंभे हटाने के लिए पहुंचे थे। जेसीबी का ड्राइवर छोटेलाल और हेल्पर ज्ञान प्रकाश अवैध रूप से लगाए गए बिजली के खंभों को गिरा रहे थे। इसी दौरान अचानक जेसीबी ऊपर से गुजर रही 11 हजार की हाई वोल्टेज लाइन से टच हो गई। जिसके चलते जेसीबी में करंट उतर गया। हादसे में जहां जेसीबी चालक छोटेलाल की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, हेलपर ज्ञान प्रकाश ने जेसीबी से कूद कर अपनी जान बचाई। कुछ अन्य कर्मचारी भी करंट की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। घटना के चलते इलाके में हड़कंप मच गया। उधर, मामला बिगड़ता देख मेडा के अधिकारी भी मौके से खिसक गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद पहुंची पुलिस ने जेसीबी चालक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। उधर, घटना को लेकर क्षेत्रवासियों में आक्रोश देखने को मिला। क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया कि मेरठ विकास प्राधिकरण की टीम ने स्थानीय बिजली घर में बिजली के खंभे हटाने की कोई सूचना नहीं दी। शटडाउन लिए बिना ही बिजली के खंभे हटाए जा रहे थे। जिसके चलते यह हादसा हुआ। उधर, घटना के बाद से मेडा के किसी अधिकारी का बयान सामने नहीं आया है।
