मेरठ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि भीषण गर्मी में अनावश्यक तौर पर बड़े पैमाने पर अभियंताओं का उत्पीड़न कर ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति फैला रहा है, जिससे बिजली कर्मचारियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है। बुधवार को 22 किसान संगठनों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जिलाधिकारी कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन कर पूर्वांचल विद्युत निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय रद्द करने की मांग की। संघर्ष समिति के आह्वान पर बिजली कर्मियों का विरोध प्रदर्शन प्रांत भर में जारी रहा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि जब बिजली कर्मचारी और अभियंता शांतिपूर्वक आंदोलन के साथ-साथ भीषण गर्मी में उपभोक्ता सेवाओं को प्राथमिकता पर अटेंड कर रहे है, तब पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन अनावश्यक तौर पर वीसी के नाम पर 87 अभियंताओं पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही करने में लगा है, जिससे ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बन गया है। संघर्ष समिति के आह्वान पर लगातार 189वें दिन मेरठ में ऊर्जा भवन कार्यालय में हुई विरोध सभा में सभी बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद की। इस मौके पर इं सीपी सिंह (सेवानिवृत), इं निशान्त त्यागी, इं प्रगति राजपूत, इं राम आशीष कुशवाहा, गुरुदेव सिंह, रविंद्र कुमार, प्रेम पाल सिंह, अश्वनी कुमार, कपिल देव गौतम, जितेन्द्र कुमार आदि उपस्थित रहे।
