
मेरठ में रेबीज संक्रमण से संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। गोलाबड़ क्षेत्र निवासी 55 वर्षीय भीम सिंह की सोमवार को मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया कि मृतक में रेबीज के स्पष्ट लक्षण दिखाई दिए थे। बताया गया कि आठ दिन पहले उन्हें पानी और हवा से डर लगने लगा था, जिसे चिकित्सकीय भाषा में हाइड्रोफोबिया कहा जाता है।
जानकारी के अनुसार, भीम सिंह की तबीयत 14 दिसंबर से बिगड़नी शुरू हुई थी। पहले उन्हें सिरदर्द हुआ, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर झाड़-फूंक कराई गई। कुछ दिनों बाद हालत और खराब होने पर परिजनों ने उन्हें निजी क्लीनिक और फिर 19 दिसंबर को बागपत रोड स्थित आस्था अस्पताल में दिखाया। वहां चिकित्सकों ने लक्षणों के आधार पर रेबीज संक्रमण की आशंका जताई और मरीज को पीएल शर्मा जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
20 दिसंबर को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे मरीज को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। यहां भी डॉक्टरों ने रेबीज की संभावना को देखते हुए दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज (आईएचबीएएस) रेफर किया। परिजन अगले दिन सुबह मरीज को दिल्ली ले जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही 21 दिसंबर की सुबह भीम सिंह ने दम तोड़ दिया।
मामले की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। डिप्टी सीएमओ डॉ. सुधीर सिंह और डॉ. रचना टंडन की टीम सोमवार सुबह मृतक के आवास पर पहुंची। जांच के दौरान रेफर दस्तावेजों में यह उल्लेख मिला कि मरीज को करीब 30 साल पहले कुत्ते के काटने की हिस्ट्री थी। इसी आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने इसे सस्पेक्टेड रेबीज संक्रमण का मामला माना है। एहतियातन मृतक के संपर्क में आए परिवारजनों और अन्य कुल 29 लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए गए हैं।
मृतक के बेटे आशीष का कहना है कि उनके पिता ने कभी परिवार को कुत्ते के काटने की बात नहीं बताई थी। उन्होंने बताया कि उनके पिता पूरी तरह स्वस्थ थे, रोज दौड़ लगाने जाते थे और घर पर ज्वैलरी पर्स बनाने का काम करते थे। अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उनकी सोचने-समझने की क्षमता भी कमजोर हो गई थी और पानी व हवा से डर लगने लगा था।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वीके बिंद्रा के अनुसार, कुत्ता काटने के बाद 24 घंटे के भीतर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना बेहद जरूरी है। गहरे घाव या खून निकलने की स्थिति में एंटी रेबीज सीरम सात दिन के भीतर लगना चाहिए। उन्होंने बताया कि रेबीज संक्रमण के लक्षण 20 दिन से लेकर कई वर्षों बाद तक भी सामने आ सकते हैं और लक्षण प्रकट होने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है।
सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने बताया कि परिजन कुत्ता काटने की स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाए। हालांकि, लक्षणों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर इस मामले को रेबीज संक्रमण का संदिग्ध केस माना गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि कुत्ता काटने की स्थिति में लापरवाही न बरतें और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेकर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाएं।
