
नई दिल्ली। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एनएसटीआई), जो अब तक मुख्य रूप से इलेक्ट्रीशियन, टेक्नीशियन और वेल्डिंग जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों तक सीमित रहे हैं, अब नए दौर की जरूरतों के अनुरूप अपनी भूमिका का विस्तार करने जा रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ अब खेल क्षेत्र को भी कौशल विकास के दायरे में लाने की तैयारी शुरू हो गई है।
कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय ने पहली बार खेलों को देश के स्किल ईकोसिस्टम से जोड़ने की दिशा में ठोस रूपरेखा तैयार करने पर काम शुरू किया है। इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ती वैश्विक खेल अर्थव्यवस्था में भारत की भागीदारी बढ़ाना और युवाओं के लिए खेलों को रोजगार के मजबूत विकल्प के रूप में विकसित करना है।
मंत्रालय के स्तर पर आईटीआई और एनएसटीआई में खेल गतिविधियों से जुड़ा प्रशिक्षण अनिवार्य करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि वर्ष 2030 में संभावित राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी को देखते हुए ऐसा खेल अवसंरचना तंत्र विकसित किया जाए, जो न केवल उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार करे, बल्कि खेल आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे।
इस पहल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री जयंत चौधरी के विचार समान माने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि मजबूत खेल अर्थव्यवस्था के जरिए युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और मेड-इन-इंडिया खेल उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाना सरकार का लक्ष्य है। वहीं जयंत चौधरी स्वयं भी खेलों को बढ़ावा देने के लिए अपने संसाधनों के उपयोग को लेकर प्रतिबद्धता जता चुके हैं।
जयंत चौधरी का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित देश के कई क्षेत्रों से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी उभर रहे हैं, लेकिन खेल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की भारी कमी है। योग प्रशिक्षक, फिजियोथेरेपिस्ट, ग्राउंड स्टाफ और अन्य तकनीकी भूमिकाओं में कुशल लोगों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
इसी को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय खेलों से जुड़े विभिन्न जॉब रोल की पहचान कर उनके लिए विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम विकसित करने की योजना बना रहा है, ताकि उन्हें औपचारिक रूप से स्किल ईकोसिस्टम का हिस्सा बनाया जा सके। प्रारंभिक प्रस्ताव के तहत देशभर की 36 एनएसटीआई और लगभग एक हजार आईटीआई में अध्ययनरत छात्रों के लिए योग प्रशिक्षण तथा छात्राओं के लिए प्रतिदिन सुबह 30 मिनट का आत्मरक्षा प्रशिक्षण अनिवार्य करने पर विचार किया जा रहा है।
प्रशिक्षण पूरा करने वाले छात्र-छात्राओं को नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क के अंतर्गत प्रमाण-पत्र देने की भी योजना है। इससे वे न केवल स्वयं फिट और कुशल बनेंगे, बल्कि भविष्य में प्रशिक्षक के रूप में अतिरिक्त आय अर्जित करने के अवसर भी प्राप्त कर सकेंगे।
इसके साथ ही सरकार आईटीआई और एनएसटीआई परिसरों की अनुपयोगी भूमि पर खेल अवसंरचना विकसित करने पर भी विचार कर रही है। यहां छात्रों को प्रशिक्षण मिलेगा और अन्य समय में आम नागरिक शुल्क देकर इन सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे, जिससे संचालन लागत भी निकल सकेगी।
मेरठ में पहले से मौजूद खेल उत्पाद उद्योग और आसपास के क्षेत्रों, खासकर हरियाणा में खेलों के मजबूत माहौल को देखते हुए सरकार मेरठ के आसपास एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्पोर्ट्स हब विकसित करने की संभावना पर भी मंथन कर रही है। इससे क्षेत्रीय युवाओं को खेल आधारित रोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे।
