नई दिल्ली एजेंसी। भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला सहित चारों एस्ट्रोनॉट आज यानी, 26 जून को करीब 28 घंटे के सफर के बाद दोपहर 3रू48 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचेंगे। पहले इनके पहुंचने का समय 4रू30 बजे था। यानी, समय से पहले ये एस्ट्रोनॉट स्पेस स्टेशन पहुंच रहे हैं। इससे पहले मिशन क्रू ने स्पेसक्राफ्ट से लाइव बातचीत की। इस दौरान शुभांशु ने कहा- नमस्कार फ्रॉम स्पेस! मैं अपने साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ यहां होने के लिए बहुत एक्साइटेड हूं।
उन्होंने कहा- ष्जब हमें वैक्यूम में लॉन्च किया गया, तब मैं बहुत अच्छा महसूस नहीं कर रहा था, मैं बहुत सोया हूं। एक बच्चे की तरह सीख रहा हूं… अंतरिक्ष में चलना और खाना कैसे है। एक्सियम मिशन 4 के तहत 25 जून को दोपहर करीब 12 बजे सभी एस्ट्रोनॉट आईएसएस के लिए रवाना हुए थे। ये मिशन पहले 6 बार तकनीकी और मौसमी दिक्कतों के कारण टल चुका था। नमस्ते फ्रॉम स्पेस! मैं अपने साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ यहां आकर बहुत उत्साहित हूं। सच कहूं तो, जब मैं कल लॉन्चपैड पर कैप्सूल में बैठा था। 30 दिन के क्वारंटाइन के बाद, मैं बस यही चाहता था कि अब चल पड़ें। लेकिन जब यात्रा शुरू हुई, तो ऐसा लगा जैसे आपको सीट में पीछे धकेला जा रहा हो। यह एक अद्भुत राइड थी.. और फिर अचानक सब कुछ शांत हो गया। आपने बेल्ट खोली और आप वैक्यूम की शांति में तैर रहे थे। मैं हर उस व्यक्ति को धन्यवाद देना चाहता हूं, जो इस यात्रा का हिस्सा रहा है। मैं समझता हूं कि यह कोई व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, यह आप सभी की सामूहिक उपलब्धि है, जो इस यात्रा का हिस्सा रहे हैं। मैं आप सभी को दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं। परिवार और दोस्तों को भी.. आपका समर्थन बहुत मायने रखता है। यह सब आप सभी की वजह से संभव हुआ है। हमने आपको जोय और ग्रेस दिखाए। यह हंस है, एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रतीक। यह बहुत प्यारा लगता है, लेकिन हमारे भारतीय संस्कृति में हंस बुद्धिमत्ता का प्रतीक है। मुझे लगता है कि पोलैंड, हंगरी और भारत में भी इसका प्रतीकात्मक महत्व है। यह संयोग जैसा लग सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसका इससे कहीं ज्यादा अर्थ है।
