मेरठ हीरा टाइम्स ब्यूरो। चौधरी चरणसिंह जिला कारागार में सुधार और पुनर्वास के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता के बाद, वीरीना फाउंडेशन ने अब आगरा जिला जेल में भी अपने अनुभव, संसाधन और समर्पण के साथ काम करने की पहल की है।
यह कदम उत्तर प्रदेश में मल्टी-जेल सहयोग मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिसमें विभिन्न जेलों के बीच उत्पादों और विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा। वीरीना फाउंडेशन और मेरठ जिला जेल के सहयोग से तैयार किए गए महिला बंदियों द्वारा निर्मित उत्पाद विशेषकर फुटबॉल ने न केवल भारत में, बल्कि ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी तक अपनी पहचान बनाई है। महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन में इन उत्पादों को व्यापक सराहना मिली, जिसने यह साबित कर दिया कि यदि अवसर दिया जाए, तो बंदी भी आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ सकते हैं। इस परिवर्तन का श्रेय डॉ. वीरेश राज शर्मा, वरिष्ठ जेल अधीक्षक मेरठ को जिनके मार्गदर्शन में वीरीना फाउंडेशन के साथ मिलकर मेरठ जेल ने सुधार और पुनर्वास का एक प्रेरणादायी मॉडल प्रस्तुत किया। इस दिशा में फाउंडेशन के संस्थापक धीरेंद्र सिंह की दूरदृष्टि और निःस्वार्थ सेवा भावना ने जेल सुधार की परिभाषा को नए सिरे से गढ़ा है। इसी क्रम में मेरठ जिला कारागार में वीरीना जेल उत्पाद केंद्र पर जूते बिक्री अभियान की शुरुआत की गई। इस अभियान का उद्घाटन वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा द्वारा किया गया। पहला जोड़ा संजय वर्मा को बेचा गया, जिसके बाद यूपी पुलिस के जवानों और अन्य नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक खरीदारी कर बंदियों द्वारा बनाए गए इन उत्कृष्ट उत्पादों को सराहा। इस अवसर पर कौशल प्रकाश, डॉ. माघवेन्द्र सिंह और अनुज प्रधान सहित कई सम्मानित अतिथि उपस्थित रहे। बतादे कि आगरा जेल में भी वीरीना फाउंडेशन अपनी विशेषज्ञता और संसाधनों के साथ पुनर्वास व कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों को सहयोग देने जा रहा है, जिससे बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में सहायता मिलेगी। यह पहल न केवल बंदियों के जीवन को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करेगी, बल्कि पूरे प्रदेश की जेल व्यवस्थाओं के लिए एक नया आदर्श भी स्थापित करेगी ,जहाँ दंड नहीं, दूसरा अवसर प्रमुख हो।
