
मेरठ। ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक और धार्मिक शब्दावली की अपनी-अपनी मर्यादा होती है, जिन्हें आपस में नहीं मिलाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री कार्यालय को ‘तीर्थ’ कहना न तो उचित है और न ही तार्किक।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय में ऐसा कौन सा तीर्थ है, जहां जाने मात्र से पाप धुल जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय में विभिन्न धर्मों के लोग कार्य करते हैं, जहां सामान्य प्रशासनिक गतिविधियां होती हैं। वहां चमड़े के जूते पहनकर अधिकारी-कर्मचारी आते-जाते हैं, ऐसे स्थान को तीर्थ कहना धार्मिक शब्दों की गरिमा के साथ अन्याय है। तीर्थ शब्द पवित्रता, आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसका प्रयोग सोच-समझकर होना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखना अनुचित है। यदि इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो आवश्यकता पड़ने पर इस विषय को न्यायालय तक भी ले जाया जाएगा।
गोरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि गोमाता की रक्षा और समर्थन के लिए राजनीतिक स्तर पर भी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में गोमाता के समर्थन में 243 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए गए थे। इनमें से 45 प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस ले लिए, जबकि 198 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में औसतन करीब तीन हजार मत प्रत्याशियों को मिले। उन्होंने कहा कि इसी तर्ज पर आगामी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भी प्रत्येक सीट पर गोसेवक के रूप में प्रत्याशी मैदान में उतारे जाएंगे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों शहर में तीन दिवसीय प्रवास पर हैं। शनिवार को उन्होंने गांधी आश्रम के समीप स्थित श्री कृष्णबोधाश्रम दंडी आश्रम में चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इसके बाद मवाना रोड स्थित डिफेंस कॉलोनी में सुदीप अग्रवाल के आवास पर पत्रकारों से बातचीत की।
इस दौरान उन्होंने अयोध्या राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि देश के किस मंदिर में चमड़े के जूते पहनकर धर्म ध्वजा फहराई जाती है। यह परंपराओं के विपरीत है और ऐसा किया जाना गलत है।
घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि जब सरकार घुसपैठियों की बात करती है, तो जिन राज्यों में वर्षों से भाजपा की सरकार है, वहां घुसपैठियों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा के कार्यकाल में घुसपैठिए देश के भीतर कैसे प्रवेश कर गए।
एसआईआर को सही ठहराते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि गोमाता को राष्ट्रीय माता घोषित करने और गोहत्या निरोधी कानून को सख्ती से लागू करने के लिए देशभर में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने सभी संतों से आह्वान किया कि यदि सरकार अपेक्षित कदम नहीं उठा रही है, तो संत समाज एकजुट होकर अपनी बात मजबूती से रखे। इसी उद्देश्य से अगले वर्ष मार्च माह में दिल्ली में संतों की एक बड़ी सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें इन विषयों पर गंभीर विचार-मंथन किया जाएगा।
बद्रीनाथ धाम यात्रा को लेकर उन्होंने कहा कि लोगों में यह गलत धारणा बन गई है कि शीतकाल में कपाट बंद होने के बाद वहां पूजा-अर्चना नहीं होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि शीतकाल में भी बद्रीनाथ धाम में नियमित रूप से पूजन चलता है और श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसी कारण पिछले तीन वर्षों से लगातार शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है।
