मेरठ। निजामी बंधुओं ने समां बांध दिया। सभागार में चांद निजामी, शादाब निजामी, सोहराब निजामी ने छाप तिलक सब छीनी तोसे नैना मिलाके गीत के साथ अपनी प्रस्तुति आरंभ की। कोई पुकारे अल्लाह तुझको, कोई कहे भगवान, हाथ खुले तो अल्लाह, हाथ जुड़े तो राम। निजामी बंधु ने ‘जब मेरे रश्के कमर तेरी पहली नजर, जब नजर से मिलाई मजा आ गया’ गाया तो दर्शक झूमने लगे। रॉकस्टार फिल्म का कुन फया कुन…कव्वाली पर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। निजामी बंधु ने सभागार में भव्य सूफियाना कव्वाली की प्रस्तुति दी। पूरा आयोजन एक सांगीतिक यात्रा के रूप में रहा। श्रोताओं को सूफी भक्ति और शांति की दिशा में मार्गदर्शन किया। सूफियाना कव्वाली भारतीय संगीत का एक अभिन्न हिस्सा है और निजामी बंधुओं ने अपनी गायकी और संगीत के माध्यम से इस परंपरा को जीवित रखा है। इस कव्वाली आयोजन में निजामी बन्धुओं ने सूफी संतों की रचनाओं को प्रस्तुत किया, जिसमें संत कवि जैसे हजरत मीर तकी मीर, हजरत अमीर खुसरो और हजरत निजामुद्दीन औलिया की रचनाओं का समावेश था। श्रोताओं ने इस आयोजन को अपनी आत्मा की गहराई तक पहुंचने का अनुभव किया। कव्वाली की ध्वनि और बोलों में ऐसा असर था कि कई लोग इसे एक आध्यात्मिक यात्रा के रूप में महसूस कर रहे थे। कव्वाली की राग, ताल और आवाज के बीच श्रोताओं ने ताजगी और आंतरिक शांति का अनुभव किया। निजामी बंधुओं ने दशकों में जोश भरते हुए ‘दमा दम मस्त कलंदर’ गीत पर सुंदर प्रस्तुति दी। इस गीत ने सभी के दिलों को छू लिया। निजामी बंधुओं ने देशभक्ति गी ‘दिल दिया है जान भी देंगे ए वतन तेरे लिए’ के बीच में अपने शेर सुनाए।इस कव्वाली आयोजन के माध्यम से निजामी बंधुओं ने न केवल सूफियाना संगीत की महत्वता को फिर से रेखांकित किया बल्कि अपनी ध्वनियों और शायरी के द्वारा सभी को एकता और प्रेम का संदेश भी दिया।
