सहारनपुर हीरा टाइम्स ब्यूरो। प्रदेश सरकार भले ही सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं और सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही हो, लेकिन जिला चिकित्सालय की जमीनी हकीकत सरकार के दावों की पोल खोल रही है। जिला चिकित्सालय की हालत बद से बदतर होती जा रही है। जहां एक ओर निर्माण कार्य अधर में लटके हैं, वहीं साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्थाएं भी लचर बनी हुई हैं। जिला अस्पताल के वार्डों में आवारा कुत्तों की खुलेआम आवाजाही रोगियों के लिए खतरे की घंटी बनी हुई है। सर्जिकल वार्ड सहित अन्य वार्डों के आसपास अक्सर इन कुत्तों का जमावड़ा देखा जाता है। हालाँकि अस्पताल प्रशासन द्वारा निजी सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित नज़र आती है। उधर अस्पताल परिसर की नालियां क्षतिग्रस्त हैं, भवनों की दीवारें और खिड़कियां जर्जर हालत में हैं। शौचालयों की स्थिति नारकीय है और निष्प्रयोज्य सामग्री का कोई निस्तारण नहीं किया गया है। जल आपूर्ति भी अव्यवस्थित बनी हुई है, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन तो लगाई गई है, परन्तु भारी जनरेटर न होने के कारण मशीन पूरी क्षमता से उपयोग में नहीं आ पा रही है। ऐसे में गंभीर मरीजों को बाहर के निजी केंद्रों पर भेजना पड़ता है, जिससे समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में कई बार मरीजों की जान पर भी बन आती है। सबसे चिंताजनक स्थिति सर्जिकल वार्ड के लिए बनाए जा रहे रैंप की है, जिसका निर्माण पिछले एक वर्ष से ठप पड़ा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, यह कार्य प्रशासनिक उदासीनता के कारण अटका हुआ है। उधर एक तीमारदार अशोक कुमार ने बताया कि जब वह अपने बड़े भाई का इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचे तो काफी देर तक उनके भाई को इलाज नहीं मिल पाया, लाइट न होने के कारण सीटी स्कैन मशीन चल नहीं पाई और उन्हें दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया, इसी दौरान उनके बड़े भाई की मौत हो गई।
