मेरठ संवाददाता। सांसद अरुण गोविल ने दूसरी बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापना की मांग रखी। इससे पूर्व भी एक बार हाईकोर्ट बेंच की मांग कर चुके हैं। उन्होंने मेरठ में आबादी के विस्तार को ध्यान में रख मेट्रो कॉरिडोर की मांग रखी। मोहिउद्दीनपुर में न्यू इंटीग्रेटेड टाउनशिप के शिलान्यास के अवसर पर सांसद अरुण गोविल को संबोधन का अवसर मिला। उन्होंने कहा देश, प्रदेश के साथ मेरठ में सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। विकास हो रहा है। पहली इंटीग्रेडिट टाउनशिप का शिलान्यास हुआ है। यह मेरठ के विकास को नई ऊंचाइयां देगा। उन्होंने बेबाकी से मेरठ क्षेत्र के विकास के लिए आशीर्वाद मांगा। उन्होंने कहा शहर का विस्तार हो रहा है। मेरठ को दो नई श्रद्धापुरी से गोकुलपुर और बागपत क्रासिंग से एमआईईटी चौक तक मेट्रो कॉरिडोर की आवश्यकता है। उन्होंने कहा नमो भारत कॉरिडोर का विस्तार हरिद्वार तक हो जाए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र जैसे छोटे राज्य में हाईकोर्ट की चौथी बेंच कोल्हापुर में मिल गई है, लेकिन मेरठ या पश्चिम उत्तर प्रदेश में कोई बेंच नहीं है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने मेरठ में गोवंश के लिए आधुनिक गोशाला की स्थापना की मांग रखी। महापुरुषों के नाम पर दिया प्रेरणादायी सुझाव सांसद ने नमो भारत कॉरिडोर (रैपिड रेल) के स्टेशनों के नामकरण को लेकर भी एक मौलिक और प्रेरणादायी सुझाव दिया। उन्होंने मांग की कि मेट्रो स्टेशन के नाम डॉ. कैलाश प्रकाश, मातादीन वाल्मीकि, मंगल पांडे, धन सिंह कोतवाल, चौधरी चरण सिंह आदि के नाम पर रखा जाए। इसके अलावा उन्होंने कहा कि मेरठ में गोवंश के लिए आधुनिक सेंक्चुअरी बने, जहां गोवंश के रहने के साथ ही उसके इलाज की व्यवस्था भी हो सके। द मेट्रो कॉरिडोर की मांग: अरुण गोविल ने मेरठ के लगातार फैलते शहरी विस्तार को देखते हुए मेट्रो कॉरिडोर की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने दो प्रस्तावित रूट मुख्यमंत्री के सामने रखे जिनमें ’’श्रद्धापुरी से गोकुलपुर’’ तक ’’बागपत क्रॉसिंग से एमआईईटी चौराहा’’ तक इन मार्गों का चयन अत्यंत रणनीतिक है क्योंकि ये मेरठ के दो प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों को जोड़ते हैं। जिससे यातायात दबाव में कमी आएगी, प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी, जन सुविधाओं में इजाफा होगा। इसके अलावा गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि उक्त मांगें एक ’’शहरी योजना और ट्रैफिक
इंजीनियरिंग’’ की दृष्टि से भी समयोचित है।
