मेरठ हीरा टाइम्स ब्यूरो। सुरों की महफिल सजी तो हर दिल देशभक्ति के रंग में रंग गया। हर दिल पुलकित हो उठा। सूफीयाना संगीत के साथ कवियों की कविताओं और शायरों की गजलों ने हर किसी को सम्मोहित कर दिया। कार्यक्रम स्थल पर हर तरफ तिरंगे लहरा रहे थे। सभागार भारत माता की जय और वंदे मातरम के जयकारों से गूंज रहा था। मौका था चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाषचंद्र बोस प्रेक्षागृह में जश्न ए आजादी एक शाम कवि, कव्वाल और शायरों के नाम कार्यक्रम का।
राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत वाजपेयी, सांसद अरुण गोविल और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर डॉ. संगीता शुक्ला ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। फिल्म गीतकार संतोष आनंद को देखकर सभी ने खड़े होकर अभिवादन किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता का जन्म दौराला में हुआ। उन्होंने कहा कितनी ही पीढियां बदल गईं पर मैं नहीं बदला हूं। मेरी शान तिरंगा है, मेरा अभिमान तिरंगा है, मेरी जान तिरंगा है। सभी ने संतोष आनंद के साथ गीत गुनगुनाया। हर तरफ भारत माता की जय गीत गूंज उठा। उन्होंने अपने शब्दों का जादू सभी को अनुभव कराया। ‘लोगों ने लूटा है मेहमान बना के’ और ‘एक प्यार का नगमा है’ सुनाया तो हर तरफ तालियां से गूंज उठीं। प्रसिद्ध कवयित्री डॉ. सीता सागर ने शहीद के परिजनों की मानसिक स्थिति का हृदयस्पर्शी शब्द चित्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि कह रहे अलविदा डबडबाए नयन, ओ शहीदों! तुम्हें मेरे सौ सौ नमन, वीर का बाप होना बड़ी बात है, इससे बढ़कर भला कौन सम्मान है? मेरा बेटा है कल लोग थे जानते, बाप उसका हूं अब मेरी पहचान है, जिसके कांधे पे जाना था मुझको कभी, वो चला मेरे कांधे पे ओढ़े कफन। इस बीच सूफी गीत में डॉ. सीता सागर ने बताया है कि हमारे पास अनगिनत रास्ते हैं। चाहे तो साकार की या निराकार की उपासना करें। जिस विधि से करें। या नास्तिक हो जाएं लेकिन फिर भी हम परमात्मा के दर पर आए हैं, तो उसका एक ही कारण है कि यह रास्ता हमने खघ्ुद चुना है। गीत के बोल कुछ यूं रहे ‘मिले रास्ते कई मुझको, मैं खघ्ुद ही इस डगर आई, फलक तक जा रहे थे सब, मगर मैं तेरे दर आई, ये दौलत बंदगी की है, बड़ी मेहनत से है पाई, तपस्या कितने जन्मों की नजर तुझको न जब आई। प्रसिद्ध शायरा हिमांशी बाबरा ने शायरी की शुरुआत करते हुए कहा कि यूं भी कर लेती हूं, टुकड़ों में तेरा इश्क कुबूल, मुझको बचपन से सिखाया है गुजारा करना। पंक्तियों को सुनकर सभागार वाह वाह के स्वरों से गूंज उठा। प्रसिद्ध शायर अजहर इकबाल ने मंच संचालन करते हुए सभी का स्वागत किया। वतन की खुशबू आदि शब्दों के साथ लोगों में देशभक्ति का जज्बा भरते हुए कहा कि कप में मौजूद रही उसके छुअन की खुशबू, चाय पीता हूं तो आती है बदन की खुशबू, खुशबुएं और भी अच्छी है बहुत दुनिया में, सबसे अच्छी है मगर मेरे वतन की खुशबू। मेरा मिट्टी का बदन उसने छुआ है जबसे, उठ रही है मेरी मिट्टी से गगन की खुशबू। आदि पंक्तियों को सुनकर श्रोता झूम उठे।
