नई दिल्ली एजेंसी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर 1 घंटा 14 मिनट बोले। उन्होंने भाषण की शुरुआत में पहलगाम हमले के आतंकियों के मारे जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन आतंकियों ने बायसरन घाटी में हमारे 26 पर्यटकों को मारा, उन्हें 28 जुलाई को ऑपरेशन महादेव में ढेर कर दिया गया। इन आतंकियों के नाम सुलेमान, फैजल अफगान और जिब्रान हैं। ये तीनों आतंकी पहलगाम हमले में शामिल थे, उन्होंने सदन में इसके सबूत भी दिए। शाह ने बताया कि आतंकियों की मदद करने वाले 2 आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। द सीजफायर और ट्रम्प पर कुछ नहीं बोले: शाह ने अपने भाषण में नेहरू, इंदिरा, आतंकवाद, सोनिया, चिदंबरम, अटलजी, मनमोहन सिंह, चीन, कश्मीर, आर्टिकल 370 का जिक्र किया। लेकिन अमेरिका, सीजफायर और ट्रम्प पर कुछ नहीं बोले। ऑपरेशन सिंदूर से ऑपरेशन महादेव कैसे चलाया इसकी जानकारी दी। द शाह ने कहा- कांग्रेस पोक मांगना भूल गई: शिमला में समझौता हुआ, पोक मांगना ही भूल गएरू ष्इंदिराजी ने पाकिस्तान के 2 टुकड़े किए। यह बहुत बड़ी विजयी थी और हम सब भी इस पर गर्व करेंगे, लेकिन युद्ध की चकाचौंध में हुआ क्या। शिमला में समझौता हुआ, पीओके मांगना ही भूल गए। अगर उस वक्त पीओके मांग लेते, तो ना रहता बांस न बजती बांसुरी। पीओके तो मांगना ही भूल गए, 15 हजार वर्ग किमी की जीती जमीन भी दे दी।
द अक्साई चिन का हिस्सा चीन को दे दिया: मैं आज पूछना चाहता हूं, 62 के युद्ध में क्या हुआ। 30 हजार वर्ग किलोमीटर अक्साई चिन का हिस्सा चीन को दे दिया गया। उस पर सदन में नेहरू जी ने कहा कि वहां घास का एक तिनका नहीं उगता, उस जगह का क्या करेंगे। उनका सिर मेरे जैसा था। एक सदस्य ने कहा कि आपके सिर पर भी एक भी बाल नहीं है, उसे चीन भेज दें क्या। द कश्मीर में आतंकी घटनाएं आधी रह गईं: मैं यूपीए सरकार और हमारी सरकार के कामकाज का लेखाजोखा रखना चाहता हूं। यूपीए सरकार में कश्मीर में जो आतंकी घटनाएं हुई, उनमें मोदी सरकार में कमी हुई। सुरक्षाबलों की मौत यूपीए में 1060 थी और हमारे समय में आधी रह गई है। अनुच्छेद 370 हटते ही आतंकियों को महिमा मंडन खत्म हुआ: अनुच्छेद 370 ने कश्मीर में आतंकवादी इकोसिस्टम को तबाह कर दिया है। एक जमाना था आतंकियों के जनाजे निकलते थे, अब जो मारा जाता है, उसे वहीं दफना दिया जाता है। आतंकियों का महिमामंडन करने की इजाजत मोदी सरकार में नहीं है। आतंकियों के समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। आज कश्मीर में पत्थरबाजी की कोई घटना नहीं होती है। पहले पत्थरबाजी में आम लोगों की मौत होती थी, आज जीरो है। द कांग्रेस ने पोटा खत्म किया: 2002 में अटल जी की सरकार थी और आतंकवाद को समाप्त करने के लिए एनडीए सरकार पोटा कानून लेकर आई। पोटा कानून का विरोध किसने किया, कांग्रेस पार्टी ने किया। हमें मजबूरन संयुक्त सत्र बुलाना पड़ा, तब पोटा कानून पारित किया गया। आज भी मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं आप किसे बचाना चाहते थे। पोटा को रोककर आप अपना उल्लू सीधा करके आतंकियों को बचाना चाहते थे।
