रूबी के अपहरण के बाद पारस सोम लगातार खतौली, दिल्ली, गुरुग्राम और सहारनपुर जैसे स्थानों पर ठिकाने बदलता रहा और मीडिया के माध्यम से गांव के हालात पर नजर रखे रहा। पुलिस की दस टीमें लंबे समय तक उसे पकड़ने में नाकाम रहीं। आखिरकार ट्रेन से किए गए एक फोन कॉल से उसकी लोकेशन ट्रेस हुई और हरिद्वार जाते समय उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने रूबी को सकुशल बरामद कर महिला पुलिस की कस्टडी में रखा है, जबकि परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए बेटी से मिलने की मांग की है।

HIGHLIGHTS
- रूबी के अपहरण के बाद पारस सोम ने कई शहरों में बदले ठिकाने।
- मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए गांव के माहौल पर रखी नजर।
- दस पुलिस टीमें 58 घंटे तक रही तलाश में नाकाम।
- ट्रेन में सहयात्री के मोबाइल से की गई कॉल बनी गिरफ्तारी की वजह।
- रूबी सुरक्षित बरामद, आशा ज्योति केंद्र में रखी गई।
- परिजनों ने पुलिस पर अविश्वास जताते हुए बेटी से मिलने की मांग की।
रूबी के अपहरण के बाद पारस सोम लगातार ठिकाने बदलता रहा और मीडिया के जरिये गांव के हालात पर नजर जमाए रहा। पुलिस की कड़ी घेराबंदी और दस टीमों की तलाश के बावजूद वह लंबे समय तक पकड़ से बाहर रहा, लेकिन आखिरकार एक फोन कॉल उसकी गिरफ्तारी की वजह बन गई।
कपसाड़ गांव स्थित रजवाहे से रूबी को अगवा करने के बाद पारस उसे पहले खतौली में अपनी रिश्तेदारी के यहां ले गया। शाम को सुनीता की मौत की खबर मिलते ही दोनों दिल्ली पहुंचे और एक होटल में रात बिताई। इसके बाद वे गुरुग्राम चले गए, जहां पारस अपने एक मित्र के पास रुका। इस दौरान वह लगातार मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से गांव के माहौल की जानकारी लेता रहा।
गांव में तनाव बढ़ने पर पारस रूबी को लेकर ट्रेन से सहारनपुर पहुंचा। यहां टपरी गांव में उसकी बहन रहती है, जहां शुक्रवार की रात गुजारी गई। शनिवार को दोनों हरिद्वार जाने के लिए ट्रेन में सवार हुए। इसी दौरान पारस ने सहयात्री के मोबाइल से गांव के झोलाछाप राजेंद्र को फोन कर अपने परिवार के बारे में जानकारी ली। यही कॉल पुलिस के लिए अहम सुराग बन गई और लोकेशन ट्रेस होते ही रुड़की पुलिस की मदद से दोनों को पकड़ लिया गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कस्टडी में पारस सोम ने रूबी के साथ प्रेम प्रसंग की बात स्वीकार की है। उसका कहना है कि इंटर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान करीब तीन साल पहले दोनों के बीच संबंध बने थे और साथ भागने का फैसला आपसी सहमति से लिया गया था। परिवार द्वारा रूबी की शादी तय किए जाने का विरोध करने पर सुनीता से कहासुनी हुई, जो हिंसक झड़प में बदल गई। पुलिस हत्या में प्रयुक्त फरसे की बरामदगी के प्रयास में जुटी है और पारस व सुनील सोम को रविवार को कोर्ट में पेश कर जेल भेजे जाने की तैयारी है।
एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि अभी युवती के बयान दर्ज नहीं कराए गए हैं। फिलहाल उसे आशा ज्योति केंद्र में महिला पुलिस की निगरानी में रखा गया है। मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल दोनों आरोपितों को सुनीता हत्याकांड में नामजद किया गया है और युवती के बयान के आधार पर धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं।
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। दस टीमों द्वारा 58 घंटे की तलाश के बावजूद पारस का कोई सुराग नहीं लग पाया था। अंततः एक फोन कॉल के जरिये ही गिरफ्तारी संभव हो सकी। परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक रूबी से मिलवाया नहीं गया है और वे पुलिस के दावों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। परिवार ने मांग की है कि पहले बेटी को उनके सामने लाया जाए और उससे बातचीत कराई जाए, उसके बाद ही किसी बयान पर विश्वास किया जाएगा।
