
देश में युवाओं में नशे की बढ़ती लत का असर अब खेल जगत में भी दिखने लगा है। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के स्पोर्ट्स ग्राउंड में प्रैक्टिस करने वाले कुछ खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन के लिए डोपिंग ड्रग्स का सहारा ले रहे हैं।
ग्राउंड और आसपास इंजेक्शनों का ढेर
स्पोर्ट्स ग्राउंड, तपोवन क्षेत्र और नजदीकी शौचालयों के पास बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन, खाली सीरिंज और मेफेनटाइन सल्फेट इंजेक्शन की शीशियां मिली हैं। आमतौर पर ब्लड प्रेशर बढ़ाने में उपयोग होने वाला यह इंजेक्शन खिलाड़ियों द्वारा परफॉर्मेंस बढ़ाने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा रहा है।
स्थानीय खिलाड़ियों और छात्रों का कहना है कि यह गतिविधि पिछले कई महीनों से चल रही है, लेकिन अब तक इसे रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
डोपिंग से करियर और स्वास्थ्य दोनों पर खतरा
डोपिंग के चलते खिलाड़ियों को भविष्य में प्रतिबंध, करियर समाप्त होने और गंभीर स्वास्थ्य नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। वहीं खुले में पड़ी इस्तेमाल की गई सीरिंज और इंजेक्शन आम लोगों के लिए भी खतरनाक हैं। इनके संपर्क में आने से संक्रमण, हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
जांच और सख्त निगरानी की मांग
खिलाड़ियों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और खेल विभाग से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है। नियमित जांच, निगरानी और डोपिंग पर रोक के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत बताई गई है।
