
HIGHLIGHTS
- मेरठ में तेंदुए की तलाश को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
- घने जंगल में सर्च ऑपरेशन के बजाय सड़कों पर गश्त करती दिखी टीम
- संदिग्ध चिमनी और जंगल क्षेत्र तक नहीं पहुंच पा रहा वन विभाग
- सुरक्षा उपकरणों के बिना तेंदुआ पकड़ने में जुटे वनकर्मी
- ड्रोन से निगरानी भी झाड़ियों के कारण रही बेअसर
हीरा संवाददाता, मेरठ। मेरठ में तेंदुए की मौजूदगी को लेकर वन विभाग की सक्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभागीय दावा है कि बीते 24 घंटे से लगातार गश्त की जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि जिन इलाकों में तेंदुए के छिपे होने की प्रबल संभावना है, वहां तक टीम पहुंच ही नहीं पा रही। घने जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाने के बजाय वनकर्मी सड़कों पर खड़े होकर या पैदल गश्त करते नजर आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी एक सड़क तो कभी दूसरी सड़क पर टीम देखी जा सकती है, लेकिन जिस चिमनी के आसपास तेंदुए के होने की आशंका जताई जा रही है, वहां अब तक वन विभाग का कोई भी दल नहीं पहुंचा। इस पर विभाग का तर्क है कि तेंदुए की तलाश उनके तय मानकों और रणनीति के अनुसार की जा रही है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी
तेंदुए जैसे खतरनाक वन्य जीव को पकड़ने के लिए विशेष सतर्कता और संसाधनों की आवश्यकता होती है। नियमों के अनुसार टीम के सदस्यों के पास हेलमेट, बूट, दस्ताने, वॉकी-टॉकी और बेहोश करने वाली गन होनी चाहिए, लेकिन मौके पर तैनात कई कर्मी केवल हाथ में डंडा लिए नजर आ रहे हैं। ऐसे में यदि तेंदुए ने हमला कर दिया तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह सवाल भी उठ रहा है।
घना जंगल बना बड़ी चुनौती
सिग्नल रेजिमेंट का क्षेत्र करीब 100 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा घने जंगल से घिरा है। ऊंची झाड़ियां और बड़े पेड़ों के बीच नीलगाय, मोर और हिरन जैसे वन्य जीव भी रहते हैं। जानकारों का मानना है कि यदि इसी जंगल में योजनाबद्ध तरीके से सर्च ऑपरेशन चलाया जाए तो तेंदुए को पकड़ा जाना आसान हो सकता है।
जंगल के बीच बंद भट्ठा बना सकता है ठिकाना
स्थानीय मजदूरों के अनुसार, पूर्व में भी तेंदुआ इस क्षेत्र में आ चुका है और तब उसने जंगल के बीच स्थित बंद पड़े ईंट-भट्ठे की चिमनी को अपना ठिकाना बनाया था। आशंका है कि इस बार भी तेंदुआ उसी चिमनी में छिपा हो सकता है। हालांकि घने जंगल और झाड़ियों के कारण वन विभाग की टीम वहां तक नहीं पहुंच पा रही है। मंगलवार को ड्रोन से निगरानी की कोशिश जरूर की गई, लेकिन झाड़ियों की अधिकता के चलते कैमरे में भी स्पष्ट दृश्य नहीं मिल सका।
स्थिति को देखते हुए अब जरूरत इस बात की है कि वन विभाग सर्च ऑपरेशन की दिशा और रणनीति पर पुनर्विचार करे, ताकि तेंदुए को जल्द सुरक्षित पकड़ा जा सके और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
