चंडीगढ़ एजेंसी। प्रो. अशीम घोष ने सोमवार को हरियाणा के 19वें राज्यपाल के तौर पर शपथ ली। चंडीगढ़ स्थित राजभवन में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू ने उन्हें शपथ दिलाई। घोष ने अपनी शपथ का भाषण अंग्रेजी में पढ़ा। शपथ ग्रहण समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी और पंजाब के गवर्नर व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी मौजूद रहे। घोष को बंडारू दत्तात्रेय की जगह राज्यपाल बनाया गया है। 14 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने उनके नाम की घोषणा की थी। घोष पश्चिम बंगाल में भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं। वाजपेयी के चहेते थे अशीम घोष रू अशीम ने पश्चिम बंगाल में संघ और बीजेपी की जड़ें जमाने में अहम भूमिका निभाई है। अभी पश्चिम बंगाल में पार्टी के मार्गदर्शक मंडल में रहकर घोष भाजपा की नीतियों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कैबिनेट में मंत्री रहे तपन सिकंदर अशीम को राजनीति में लाए थे। वाजपेयी ने ही घोष की निपुणता को देखते हुए पश्चिम बंगाल में भाजपा की कमान सौंपी थी। भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए रू अशीम घोष 1999 से लेकर 2002 तक पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने जून 2013 में हावड़ा लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ा था। यह सीट तृणमूल कांग्रेस की सांसद अंबिका बनर्जी के निधन के बाद खाली हुई थी। हालांकि, अशीम उपचुनाव हार गए थे। 20 साल से सक्रिय राजनीति से दूर रू घोष उत्तर कोलकाता के श्री शिक्षायतन कॉलेज में प्रोफेसर रहे हैं। उन्हें पश्चिम बंगाल भाजपा के उथल-पुथल वाले दौर में एक अनुशासित और वैचारिक रूप से स्पष्ट सोच रखने वाले बुद्धिजीवी के रूप में जाना जाता है। हालांकि उन्होंने सक्रिय राजनीति करीब 20 साल पहले छोड़ दी थी, फिर भी पार्टी में उनकी छवि एक सम्मानित और मार्गदर्शक व्यक्ति के रूप में बनी रही।
