आशा ज्योति केंद्र में पिता और स्वजनों से मिलने पर रूबी भावुक हो गई और फूट-फूटकर रो पड़ी। उसने बताया कि पारस सोम ने उसके साथ जाने से इंकार करने पर उसकी मां सुनीता की बेरहमी से हत्या कर दी और बंदूक दिखाकर उसे अगवा कर लिया। रूबी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी परिवार, पुलिस और अदालत के सामने एक जैसी दी है। परिवार ने रूबी के बयान को सच बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

HIGHLIGHTS
- आशा ज्योति केंद्र में पिता से मिलते ही रूबी भावुक होकर रो पड़ी
- मां की हत्या का आंखों देखा हाल रूबी ने स्वजनों को बताया
- बंदूक दिखाकर गन्ने के खेत में बनाया गया था बंधक
- डर की वजह से ट्रेन और रास्ते में नहीं मचा सकी शोर
- पुलिस और कोर्ट में दिए बयान एक जैसे, सच पर अडिग रही रूबी
- घटना के समय पारस अकेला था, फरसा और बंदूक उसके पास थी
आशा ज्योति केंद्र में पिता से मिलते ही रूबी फूट-फूटकर रो पड़ी। पिता से लिपटकर वह बार-बार यही कहती रही कि आखिरकार उसने मेरी जिंदगी की सबसे प्यारी चीज छीन ली। आंखों में आंसू और आवाज में दर्द लिए रूबी ने अपने पिता और स्वजनों को पूरी आपबीती सुनाई।
रूबी ने बताया कि पारस सोम ने उसकी मां सुनीता की बेरहमी से हत्या सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि उसने उसके साथ जाने और बात करने से मना कर दिया था। वह मां को बचाने के लिए हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाती रही, लेकिन पारस ने फरसे से लगातार वार किए। जब उसने शोर मचाने की कोशिश की तो पारस ने अंटी से बंदूक निकालकर गोली मारने की धमकी दी और उसे जबरन गन्ने के खेत में खींच ले गया।
रूबी ने बताया कि घटना के बाद पारस उसे डराता रहा और कहता रहा कि अगर उसने किसी को बताया तो वह उसके पिता और भाई को भी मार देगा। इसी डर के कारण वह ट्रेन और अन्य स्थानों पर शोर नहीं मचा सकी। उसने बताया कि वह अपनी मां का अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाई, जिसका गम उसे अंदर तक तोड़ रहा है।
रविवार शाम आशा ज्योति केंद्र में सीओ सरधना आशुतोष कुमार के साथ रूबी के पिता सतेन्द्र, भाई नरसी, शिवम और बहन सर्वेश उसे मिलने पहुंचे। चार दिन बाद परिवार को देखकर रूबी का संयम टूट गया। पिता से गले लगकर वह देर तक रोती रही। भाई-बहन भी अपने आंसू नहीं रोक सके।
परिवार को रूबी ने बताया कि वह अपनी दो सहेलियों के साथ गन्ना छीलने पिता के पास जा रही थी, जबकि मां पीछे आ रही थीं। इसी दौरान रजवाहे के पास पारस अचानक गन्ने के खेत से निकल आया। उसके हाथ में फरसा और चेहरे पर गुस्सा देखकर सहेलियां भाग गईं। पारस ने रूबी का हाथ पकड़ लिया और जबरन ले जाने लगा। मां ने विरोध किया तो उसने उन पर जानलेवा हमला कर दिया।
मां के गिरने के बाद पारस रूबी को घसीटकर गन्ने के खेत में ले गया। वह किसी तरह रजवाहे में कूदकर बचने की कोशिश करती रही, लेकिन पारस पीछे से पहुंचा और बंदूक दिखाकर उसे बंधक बना लिया। करीब डेढ़ घंटे तक वह उसे खेत में बैठाए रहा, फिर डराते-धमकाते हुए गंगनहर पटरी तक ले गया। वहां से ट्रक रुकवाकर पहले खतौली, फिर दिल्ली ले गया और लगातार बंदूक दिखाकर चुप रहने की धमकी देता रहा।
रूबी ने बताया कि बाद में वह उसे ट्रेन से वापस खतौली लाया और फिर हरिद्वार ले जाने की तैयारी कर रहा था। रास्ते में घर बात करने की जिद करने पर पारस ने एक परिचित से फोन मंगवाकर डॉक्टर से बात कराई। इसी दौरान पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया।
परिवार के अनुसार, रूबी ने पुलिस और अदालत में भी वही बयान दिए हैं जो उसने स्वजनों को बताए। भाई नरसी ने कहा कि उसकी बहन ने सच के अलावा कुछ नहीं कहा। उसने साफ बताया कि पारस ने उसे जबरन अगवा किया, मां की हत्या की और उसे बंदूक के बल पर बंधक बनाकर रखा।
नरसी ने यह भी बताया कि पूछताछ के दौरान सीओ सरधना ने रूबी से घटना में इस्तेमाल हथियार के बारे में पूछा, जिस पर उसने कागज पर फरसे का चित्र बनाकर दिखाया। रूबी के मुताबिक, घटना के समय पारस अकेला था और किसी कार का इस्तेमाल नहीं किया गया था। इसी बयान के आधार पर पुलिस हिरासत में लिए गए अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर रही है।
