सहारनपुर हीरा टाइम्स ब्यूरो। अन्तर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध सप्ताह के अंतर्गत आयोजित संगोष्ठी में डिप्टी कलेक्टर श्रीमती श्वेता ने बाल श्रम कुरीति को समाप्त करने पर जोर देते हुए कहा कि हम सभी व आमजन को जागरूक होना होगा कि हम कहीं पर भी बाल श्रमिक नियोजित न होने दें, क्योंकि आज का बच्चा कल का भविष्य निर्माता है इसलिए बच्चों को शिक्षा दिलया जाना अनिवार्य है। डिप्टी कलेक्टर श्रीमती श्वेता आज यहां कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मनीष बंसल के निर्देशों के क्रम में बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन अन्तर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध सप्ताह पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रही थी। उप श्रमायुक्त ने बाल श्रम बाल और किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 यथा संशोधित अधिनियम 2016 में विनिर्दिष्ट प्रावधानों तथा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी और कहा कि हम सबको बच्चों से कार्य नहीं कराया जाना चाहिए तथा हमें प्रण करना है कि हमें जनमानस में जागरूकता लानी है कि वे बच्चों से कार्य न करायें, बल्कि उनको स्कूल में शिक्षा दिलायें। वन्दना गुप्ता ने कहा कि बाल श्रम का मुख्य कारण गरीबी है। बच्चों के माता-पिता को भी यह सोचना होगा कि बच्चों से कार्य न कराकर उन्हें स्कूल में शिक्षा दिलायें। श्रम विभाग द्वारा निर्माण श्रमिकों के बच्चो ंके लिए मण्डल सहारनपुर में अटल आवासीय विद्यालय, मुजफरनगर में संचालित है, जिसमें कक्षा-6 से कक्षा-12 तक निःशुल्क आवासीय शिक्षा दी जा रही है। जिलाधिकारी के प्रयास से सहारनपुर में भी अटल आवासीय विद्यालय हेतु भूमि का चिन्हांकन कर लिया गया है, जल्द ही जनपद सहारनपुर में भी अटल आवासीय विद्यालय बनाया जायेगा। उन्होंने दुकानदारों व औद्योगिक प्रतिष्ठानों के स्वामियों से अपील की कि वह बच्चों को रोजगार पर न रखकर वयस्क पुरूष व स्त्री को ही रोजगार पर रखें। श्रम प्रवर्तन अधिकारी शैलेन्द्र शिवम त्रिपाठी ने मजदूरों के हितार्थ सरकार द्वारा चालायी जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया। जिला स्वछता सलाहकार देवभास्कर पाण्डेय ने सुझाव दिया कि ग्राम पंचायत स्तर पर श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, जिला महिला एवं बाल कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पंचायत राज विभाग एवं अन्य विभागों द्वारा संयुक्त रूप से कार्यक्रम आयोजित कर अपने विभाग की योजना की जानकारी दी जानी चाहिए तथा बाल श्रमिक यदि कहीं हो, तो उन्हें चिन्हित कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की कार्यवाही करायी जानी चाहिए। चैम्बर ऑफ इण्डस्ट्रीज एण्ड सर्विस अध्यक्ष रविन्द्र मिगलानी ने कहा कि बाल श्रम जैसी कुरूति को समाप्त करने हेतु आमजन को जनजागरूकता लाया जाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि हमारे संगठन से सम्बन्धित कोई भी औद्योगिक इकाई बाल व किशोर श्रमिक नियोजित नहीं करती है। संगोष्ठी में सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष अनिल कुमार, व्यापार मण्डल के जिलाध्यक्ष शीतल टण्डन, सुरेन्द्र कुमार ने भी बाल श्रमिक नियोजन न करने पर अपने विचार व्यक्त किये गये। संगोष्ठी में प्रतिनिधि बीएसए श्रीमती श्रेया, जिला स्वच्छता सलाहकार देवभास्कर, सीडीपीओ कंवरजहां त्यागी, जिला मलेरिया अधिकारी श्रीमती शिवांका गौर, सीडीपीओ नानौता श्रीमती रेखा, एसआई एएचटीयू सन्दीप कुमार, चैम्बर ऑफ इण्डस्ट्रीज एण्ड सर्विस के अध्यक्ष रविन्द्र मिगलानी, मंजित सिंह अरोड़ा, संजय गुप्ता, विजय वशिष्ट, श्रवण सिंह, सुरेन्द्र कुमार, निशान्त, सुरेन्द्र मोहन, रविन्द्र कालरा आदि उपस्थित रहे।
