भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर अमेरिका की ओर से अहम दावा सामने आया है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने कहा कि यह समझौता लगभग तय था, लेकिन अंतिम स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सीधा संवाद नहीं हो सका, जिससे डील अटक गई। लटनिक के मुताबिक, इसके बाद अमेरिका ने अन्य एशियाई देशों के साथ व्यापार समझौतों की घोषणा कर दी। हालांकि, टैरिफ दरों और समझौतों के क्रम को देखते हुए अमेरिकी दावों की सच्चाई पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

HIGHLIGHTS
- अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बड़ा बयान दिया।
- लटनिक के अनुसार, पीएम मोदी के ट्रंप को फोन न करने से अंतिम समझौता नहीं हो सका।
- भारत के बाद अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम से व्यापार समझौते किए।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अमेरिका की ओर से एक बार फिर बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने कहा है कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन करते, तो यह समझौता संभव हो सकता था। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता लगभग तय हो चुका था, लेकिन अंतिम स्तर पर संपर्क न होने के कारण यह डील आगे नहीं बढ़ सकी।
हॉवर्ड लटनिक ने यह बयान अमेरिकी वेंचर कैपिटलिस्ट चमाथ पालिहापितिया के साथ ‘ऑल-इन पॉडकास्ट’ में बातचीत के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह राष्ट्रपति स्तर का सौदा था और अंतिम निर्णय डोनाल्ड ट्रंप को लेना था। लटनिक के मुताबिक, सभी शर्तें लगभग तय थीं और केवल प्रधानमंत्री मोदी के फोन कॉल की आवश्यकता थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिससे समझौता रुक गया।

अमेरिकी वाणिज्य सचिव ने आगे बताया कि भारत के साथ बातचीत आगे न बढ़ पाने के बाद अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों के साथ व्यापार समझौतों की घोषणा कर दी। उनके अनुसार, इन देशों ने अपेक्षाकृत जल्दी सहमति जताई, जिससे उनके साथ सौदे संभव हो सके।
हालांकि, लटनिक के दावों की वास्तविकता पर सवाल भी उठ रहे हैं। जुलाई 2025 में अमेरिका की यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम, जापान, दक्षिण कोरिया समेत कई देशों के साथ टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही थी। उस दौरान जिन देशों के साथ समझौते हुए, उनके टैरिफ ढांचे और समय-सीमा लटनिक के बयानों से पूरी तरह मेल नहीं खाते।
विशेष रूप से वियतनाम का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के साथ बातचीत पूरी करने के बावजूद वियतनाम पर अभी भी उच्च टैरिफ लागू है। 2 जुलाई से वियतनाम के निर्यात पर 20 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जो अन्य देशों की तुलना में अधिक माना जा रहा है। ऐसे में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अमेरिकी दावों पर बहस और तेज हो गई है।
