मेरठ के सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से व्यापारी आशंकित हैं। 16 जनवरी की सुनवाई से पहले व्यापारी कानूनी सलाह ले रहे हैं और आगे की रणनीति तय करने के लिए शनिवार को बाजार में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण आदेश से सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों में बढ़ी चिंता।
- 16 जनवरी की सुनवाई से पहले दिल्ली में वरिष्ठ अधिवक्ताओं से ली गई कानूनी राय।
- रणनीति तय करने के लिए आज सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों की आवश्यक बैठक।
मेरठ के सेंट्रल मार्केट से जुड़े ध्वस्तीकरण मामले को लेकर व्यापारियों में गहरी चिंता व्याप्त है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर आगे की कानूनी रणनीति तय करने के लिए व्यापारी सक्रिय हो गए हैं। शुक्रवार को व्यापारी प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा और वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह ली। मामले की सुनवाई 16 जनवरी को प्रस्तावित है, जिसे लेकर बाजार में बेचैनी का माहौल बना हुआ है।
इसी क्रम में शनिवार को सेंट्रल मार्केट में सुबह 10:30 बजे व्यापारियों की एक अहम बैठक बुलाई गई है। बैठक में शास्त्रीनगर और जागृति विहार के व्यापारियों को भी आमंत्रित किया गया है। बैठक के चलते शनिवार को दुकानों को दोपहर 12 बजे के बाद खोलने का निर्णय लिया गया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने और आगे की कार्रवाई पर चर्चा की जाएगी।
गौरतलब है कि एक दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने आवास विकास परिषद को दो माह के भीतर सभी अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया था। इसी सुनवाई के दौरान परिषद की ओर से शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट को ध्वस्त किए जाने की जानकारी भी कोर्ट को दी गई थी। अदालत ने अन्य अवैध निर्माणों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण भी प्रस्तुत करने को कहा था।
व्यापारियों का कहना है कि अब तक शमन के लिए आवेदन देने के अलावा कोई ठोस राहत नहीं मिल पाई है। उन्हें आशंका है कि आगामी सुनवाई में ऐसा कोई आदेश न आ जाए, जिससे अब तक की सभी कोशिशें बेअसर हो जाएं। व्यापार बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष जितेंद्र अग्रवाल ने बताया कि व्यापारियों को अब तक सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला है। उनका कहना है कि व्यापारी शमन कराने और मानचित्र के अनुरूप निर्माण कराने को तैयार हैं तथा राहत और समय-सीमा बढ़ाने के लिए विधिक राय ली जा रही है।
उन्होंने बताया कि शास्त्रीनगर योजना संख्या-7 में कुल 729 निर्माण चिह्नित किए गए हैं, जिनमें ढाई हजार से अधिक दुकानें शामिल हैं। यदि बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है तो हजारों परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। वहीं, मामले में अवमानना याचिका दायर करने वाले लोकेश खुराना ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में इस प्रकरण की अगली सुनवाई 16 जनवरी को निर्धारित है।
