मेरठ हीरा टाइम्स ब्यूरो। बेगमपुल जीरो माइल एसजीएम गार्डन में विश्वंभर सहाय प्रेमी की स्मृति में काव्य संध्या एवं सम्मान समारोह वाणी फाउंडेशन के द्वारा किया गया। अतिथियों के स्वागत के बाद सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम आरंभ हुआ। ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद स्वामी जी ने व्यंग्य के अनूठे हस्ताक्षर तेज नारायण शर्मा बेचौन को प्रेमी वाणी काव्य सम्मान 2025 से सम्मानित किया। वीर रस के प्रसिद्ध कवि डा. हरिओम पंवार के काव्यपाठ ने समारोह को गरिमामयी बना दिया। कवि सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए डॉ. प्रवीण शुक्ल ने कहा, खरे करता है सारे काम, कुछ खोटा नहीं करता, अहम का अपने चारों ओर, परकोटा नहीं करता। ग्वालियर से आए तेज नारायण शर्मा ने व्यंग्य कसा कि सड़क रास्ते जाम कराकर, जलवा अपने नाम कराकर, सभी मसीहा लौट चुके हैं, शहर में कत्लेआम कराकर । प्रसिद्ध कवि सुमित ने कहा धर्म देश की रक्षा में जो तत्पर सबसे अग्रणीय थी। भारत का सम्मान बचाया। वो गुरुओं की पगड़ी थी। प्रियंका राय ने कहा, प्रश्न जो उठाते रहे बार-बार सैनिकों पे, उनके लिए भी एक छोटा सा संदेश था, बहन बेटियों के रक्षार्थ ही जिए, मरेंगे, पूर्वजों से हमें मिल रहा उपदेश था। कार्यक्रम के अंत में मोहित शौर्य ने कहा कि दुनिया को नए भारत का यशगान सुनाया है हमने, दुश्मन के घर में घुसकर ही जश्न मनाया है हमने। कार्यक्रम में समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और धर्म प्रेमी मौजूद रहे। व्यापार के लिए पीआर, परिवार के लिए संस्कार की जरूरत: स्वामी चिदानंद मेरठ। मेरठ कालेज स्थित ओज के प्रसिद्ध कवि हरि ओम पंवार के आवास पर परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कारगिल विजय दिवस पर हर भारत वासी को सैनिकों के बलिदान को नमन करना चाहिए। ऐसे सैनिक वेतन नहीं वतन के लिए कार्य करते हैं। मेरठ शांति और क्रांति की धरती है। साहित्यकार विश्वंभर सहाय प्रेमी को ऋषि की संज्ञा देते हुए कहा, उनकी जयंती पर आयोजित कवि सम्मेलन में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने यहां आए हैं। स्वामी चिदानंद ने कहा कि व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए पीआर की आवश्यकता होती है, लेकिन परिवार के लिए संस्कार की जरूरत है। इसका दायित्व कवि और साहित्यकार का है। सफलता और प्रसन्नता के लिए हमें ऋषि मुनियों के शिक्षाओं का अनुसरण होगा। इंटरनेट रफ्तार देता है, लेकिन दिशा नहीं देता है। हम संग्रह करने में लगे हैं, पर खुद को कनेक्ट नहीं कर पा रहे हैं। हमें अपने अंतरमन को भी आंकने की कला सीखनी होगी। एसजीएम गार्डन में होने वाली काव्य संध्या युवाओं को सही दिशा देने का ही प्रयास है।
