
HIGHLIGHTS
- विकास भवन परिसर में बंदरों ने विधायकों व अधिकारियों की गाड़ियों पर चढ़कर जमकर उत्पात किया।
- विधान परिषद समिति की बैठक के समय बाहर अव्यवस्था का माहौल बना रहा।
- बंदरों की बढ़ती समस्या पर नगर निगम और वन विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठे।
हीरा संवाददाता, मेरठ। एक ओर जहां विकास भवन के भीतर विधान परिषद समिति की बैठक चल रही थी, वहीं बाहर बंदरों ने जमकर उत्पात मचाया। बैठक के दौरान बंदर एक के बाद एक विधायकों और अधिकारियों की गाड़ियों पर चढ़ते रहे। कभी किसी विधायक की कार पर बंदर उछलता दिखा तो कभी एसपी की गाड़ी की छत पर बैठकर कूदता रहा। एक बंदर को भगाया जाता, उससे पहले दूसरा किसी दूसरी गाड़ी पर चढ़ जाता। यह अफरा-तफरी लगभग एक घंटे तक जारी रही।
बंदरों के उत्पात से सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों को भी खासी मशक्कत करनी पड़ी। समिति के सभापति की गाड़ी के पास खड़े कर्मचारियों पर बंदरों ने कई बार हमला करने की कोशिश की। हालात काबू में करने के लिए विकास भवन के कर्मचारी, होमगार्ड और अन्य स्टाफ हाथों में लाठी लेकर बंदरों को भगाते नजर आए, लेकिन वे बार-बार लौट आते थे।
कर्मचारियों का कहना है कि विकास भवन में बंदरों का आतंक कोई नई बात नहीं है। सामान्य दिनों में भी बंदर यहां आने वाले जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और फरियादियों के लिए परेशानी का कारण बने रहते हैं। नगर निगम से कई बार बंदर पकड़ने की मांग की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। वहीं, वन विभाग की ओर से यह कहकर जिम्मेदारी से बचा जाता है कि बंदर वन्य जीव की श्रेणी में नहीं आते, जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है।
इस मामले पर जिला विकास अधिकारी श्वेतांक सिंह ने कहा कि विकास भवन में बंदरों की संख्या काफी बढ़ गई है। नगर निगम को इस संबंध में पत्र लिखा जाएगा। मौखिक रूप से कई बार अवगत कराया जा चुका है। बंदरों के कारण यहां आने वाले फरियादी भी भय के साये में रहते हैं।
